Ram Navami 2017 Date Birth Story of Lord Rama,

Story of Shree Ram Navami 2017

रामनवमी 2017 चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी बुधवार 5 अप्रेल 2017 रामनवमी को राम के जन्‍मदिन की स्‍मृति में मनाया जाता है।

 

रामनवमी का त्यौहार भगवान राम के जन्म स्‍मृति को समर्पित है। राम सदाचार दया के प्रतीक हैं, और इन्हें “मर्यादा पुरुषोतम श्री राम ” कहा जाता है। रामनवमी को राम के जन्‍मदिन की स्‍मृति में मनाया जाता है। राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, जो पृथ्वी पर अजेय रावण  से युद्ध लड़ने के लिए आए। राम राज्‍य शांति व समृद्धि की अवधि का पर्यायवाची बन गया है। रामनवमी के दिन, श्रद्धालु बड़ी संख्‍या में उनके जन्‍मोत्‍सव को मनाने के लिए राम जी की मूर्तियों को पालने में झुलाते हैं। इस महान राजा की काव्‍य तुलसी रामायण में राम की कहानी का वर्णन है।

श्री राम के मर्यादा पुरुषोत्तम तक की कहानी

जब राक्षसों के राजा रावण का अभिमान और अत्याचार से पृथ्वी पर हर मानव को यह बाध्य किया जाता था की रावण को ही भगवन माने तब भगवान विष्णु ने राम रूप में असुरों का संहार करने के लिए मानव के रूप में पृथ्वी पर अवतार लेने का संकल्प लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव तो धूमधाम से मनाया जाता है पर उनके आदर्शों को जीवन में नहीं उतारा जाता। अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी भगवान राम अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण राज वैभव को त्याग 14 वर्ष के लिए वन चले गए और आज देखें तो वैभव की लालसा में ही पुत्र अपने माता-पिता का काल बन रहा है।

भगवान श्री राम का जन्म

हिन्दु धर्म शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारो को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक पृथ्वी लोक में श्री राम के रुप में अवतार लिया था. यह दिन भारतीय जीवन में पुण्य पर्व माना जाता हैं। इस दिन सरयू नदी में स्नान करके लोग पुण्य लाभ कमाते हैं।चैत्र शुक्ल नवमी का विशेष महत्व है। त्रेता युग में भगवान श्री राम चैत्र शुक्ल नवमी के दिन रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ अखिल ब्रह्माण्ड नायक अखिलेश ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था। राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी दिन के बारह बजे हुआ था, जैसे ही सौंदर्य निकेतन, शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण कि‌ए हु‌ए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हु‌ए तो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो ग‌ईं। राम के सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे। देवलोक भी अवध के सामने श्रीराम के जन्मोत्सव को देखकर फीका लग रहा था। जन्मोत्सव में देवता, ऋषि, किन्नर, चारण सभी शामिल होकर आनंद उठा रहे थे। रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना का श्रीगणेश किया था।

चैत्र शुक्ल नवमी व्रत पूजन विधि

चैत्र शुक्ल नवमी के दिन यह व्रत महिलाओ के द्वारा किया जाता हैं इस दिन सुबह जल्दी उठकर अपने घर की साफ़ सफाई कर गंगाजल छिड़कर पवित्र किया जाता हैं उसकेबाद में स्नान करके राम नवमी के व्रत का संकल्प लिया जाता हैं | इसके पश्चात इसके बाद एक लकड़ी के चौकोर पाटिया पर सतिया बनाकर एक जल से भरा गिलास रखना चाहिए और अपनी अंगुली से चाँदी का छल्ला निकाल कर रखना चाहिए। इसे प्रतीक रुप से गणेशजी माना जाता है। व्रत की कथा सुनते समय महिला अपने हाथ में सात प्रकार के अनाज गेहूँ-बाजरा आदि के दाने लेकर कहानी सुनने का भी महत्व कहा गया है। रामनवमी के व्रत के दिन मंदिर में अथवा मकान पर ध्वजा, पताका, तोरण और बंदनवार आदि से सजाने का विशेष विधि-विधान है। व्रत के दिन कलश स्थापना और राम जी के परिवार की पूजा करनी चाहिए, और भगवान श्री राम का दिनभर भजन, स्मरण, स्तोत्रपाठ, दान, पुण्य, हवन, पितृश्राद्व और उत्सव किया जाना चाहिए।

रामनवमी व्रत कथा

भगवान श्री राम, सीता और लक्ष्मण जब 14 वर्ष के वनवास के लिए वन में जा रहे थे। तब सीता जी और लक्ष्मण को थका हुआ देखकर श्री राम जी ने थोड़ा रुककर आराम करने का विचार किया और एक बुढ़िया के घर गए। बुढिया सूत कात रही थी। बुढ़िया ने उनका स्वागत, आवभगत की और बैठाया, स्नान-ध्यान करवाकर भोजन करवाया। तब राम जी ने कहा- बुढिया माई, “पहले मेरा हंस को मोती चुगाओ, तभी मै भोजन करूं।”गरीब बुढ़िया के पास मोती कहाँ से आवें, सूत कात कर अपना गुज़ारा करती थी। अतिथि को ना कहना भी वह ठीक नहीं समझती थी। दुविधा में पड़ गई। अत: दिल को मज़बूत कर राजा के पास गई। और अंजली मोती देने के लिये विनती करने लगी। राजा आशचर्य हुआ कि इसके पास खाने को दाने नहीं हैं और मोती उधार मांग रही है। इस स्थिति में बुढ़िया से मोती वापस प्राप्त होने का तो सवाल ही नहीं उठता। आखिर राजा ने अपने नौकरों से कहकर बुढ़िया को मोती दिला दिये।

बुढ़िया मोती लेकर घर आई, हंस को मोती चुगाए और मेहमानों को भोजन करवाया। रात को विश्राम कर सवेरे राम जी, सीता जी और लक्ष्मण जी जाने लगे। राम जी ने जाते हुए उसके पानी रखने की जगह पर मोतियों का एक पेड़ लगा दिया। दिन बीतते गये और पेड़ बड़ा हुआ, पेड़ बढ़ने लगा, पर बुढ़िया को कु़छ पता नहीं चला। मोती के पेड़ से आस-पड़ौस के लोग मोती ले जाने लगे।

एक दिन जब बुढ़िया उस मोटी के पेड़ के नीचे बैठी सूत कात रही थी। तो उसकी गोद में एक मोती आकर गिरा। बुढ़िया को तब ज्ञात हुआ। उसने जल्दी से मोती बांधे और अपने कपड़े में बांधकर वह क़िले की ओर ले चली़। उसने मोती की पोटली राजा के सामने रख दी। इतने सारे मोती देख राजा अचम्भे में पड़ गया। उसके पूछने पर बुढ़िया ने राजा को सारी बात बता दी। राजा के मन में लालच आ गया। वह बुढ़िया से मोती का पेड़ मांगने लगा। बुढ़िया ने कहा कि आस-पास के सभी लोग ले जाते हैं। आप भी चाहे तो ले लें। मुझे क्या करना है। राजा ने तुरन्त पेड़ मंगवाया और अपने दरबार में लगवा दिया। पर रामजी की मर्जी, मोतियों की जगह कांटे हो गये और आते-आते लोगों के कपड़े उन कांटों से ख़राब होने लगे। एक दिन रानी की ऐड़ी में एक कांटा चुभ गया और पीड़ा करने लगा। राजा ने पेड़ उठवाकर बुढ़िया के घर वापस भिजवा दिया। पेड़ पर पहले की तरह से मोती लगने लगे। बुढ़िया आराम से रहती और ख़ूब मोती बांटती।

राम नवमी व्रत का फल

राम नवमी के व्रत का हिन्दू धर्म में बहुत की महत्व मन जाता हैं इस दिन जो कोई व्यक्ति या महिला यह व्रत करता हैं तो उसके ज्ञान में वृ्द्धि , धैर्य शक्ति का विस्तार ,धन में अधिकता उनके विचार शक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता की भी वृ्द्धि होती है। रामनवमी और जन्माष्टमी तो उल्लासपूर्वक मनाते हैं | कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता ज्ञान आज सिर्फ एक ग्रंथ बनकर रह गया है। तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में भगवान राम के जीवन का वर्णन करते हुए बताया की प्रातः अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करना चाहिए और उनकी सेवा कर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे जो व्यक्ति श्री राम के आचरणों के अनुसार अपने माता और पिता की सेवा के भाइयो से प्यार करता हैं वही जीवन में सफल होता हैं |

राम नवमी के त्यौहार पर SMS से दोस्‍तों को हार्दिक बधाई दे |

आज प्रभु राम ने लिया अवतार,
जैसे संत सौम्‍य है रामजी,
वैसे ही आपका जीवन भी मंगलमय हो.
राम नवमी मुबारक हो.

राम नवमी के अवसर पर,
आप और आपके परिवार पर,
राम जी का आशीर्वाद, हमेशा बना रहे,
हमारी तरफ से आपको रामनवमी की शुभकामनाएं.

मन में जिनके श्री राम हैं,
उसके ही बैकुंठ-धाम हैं,
उनपर जिसने जीवन वार दिया,
उसका सदा होता कल्याण है,
आपको रामनवमी की बधाई.

गुणवान तुम, बलवान तुम,
भक्‍तन को देते हो वरदान तुम,
भगवान तुम हनुमान तुम,
मुश्किल को कर दे आसन तुम.
रामनवमी की बधाई

राम को जीवन का परम सत्य मान,
जीवन पथ पर आगे बढ़ते चलो,
प्रभु राम रहेंगे सदा आपके साथ,
भाग्य में सफलता का प्रभु देंगे यश मान.
राम नवमी की शुभकामनाएं.

राम जिनका नाम है, अयोध्या जिनका धाम है,
ऐसे रघुनंदन को हमारा प्रणाम है,
आपको और आपके परिवार को राम नवमी की शुभकामनाएं.

राम आपके जीवन में प्रकाश लाएं,
राम आपके जीवन को सुंदर बनाएं,
तेज कर अज्ञान का अंधकार,
आपके जीवन में ज्ञान का प्रकाश आए.
रामनवमी की शुभकामनाएं

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