धन तेरस 2017 पर कुबेर की पूजा और खरीददारी का महत्व

धनतेरस पर कुबेर की प्रदोष काल पूजा मुहूर्त

आपके पास श्री कुबेर की मूर्ति है तो वह पूजा में उपयोग की जा सकती है अगर आपके पास कुबेर की मूर्ति नहीं है तो उसके बदले आप तिजोरी या गहनों के बक्से को श्री कुबेर के रूप में मानिये और उसकी पूजा कीजिये तिजोरी, बक्से आदि की पूजा से पहले सिन्दूर से स्वस्तिक-चिह्न बनाना चाहिए और उस पर ‘मौली’ बाँधना चाहिए।

धनतेरस पूजा मुहूर्त= “17:34” से “18:20” स्थिर लग्न के बिना
अवधि= “46” मिनट
प्रदोष काल= “17:34” से “20:11”
वृषभ काल+ “18:33” से “20:27”
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ= “27” अक्टूबर 2016 को “16:15” बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त= “28” अक्टूबर 2016 को “18:20” बजे

धनवंतरि की पूजा

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की मूर्ति या चित्र साफ स्थान पर पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें और फिर भगवान धनवंतरि का आह्वान निम्न मंत्र से करें
सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपं, धनवंतरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।
इसके बाद पूजन स्थल पर चावल चढ़ाएं और आचमन के लिए जल छोड़े भगवान धनवंतरि के चित्र पर गंध, गुलाब के पुष्प तथा रोली, आदि चढ़ाएं चांदी के पात्र में खीर का नैवेद्य लगाएं अब दोबारा आचमन के लिए जल छोड़ें मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। धनवंतरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें अब भगवान धनवंतरि को श्रीफल व दक्षिणा चढ़ाएं अब दोबारा आचमन के लिए जल छोड़ें रोगनाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें – “ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।”

कुबेर की पूजा

धनतेरस पर धन के देवता भगवान् कुबेर को प्रसन्न कर धनवान बन सकते हैं यदि कुबेर आप पर प्रसन्न हो गए तो आप के जीवन में धन-वैभव की कोई कमी नहीं रहेगी कुबेर को प्रसन्न करना बेहद आसान है। धन-सम्पति की प्राप्ति हेतु घर के पूजास्थल में एक दीया जलाएं मंत्रोचार के द्वारा आप कुबेर को प्रसन्न कर सकते हैं इसके लिए जातक, कुबेर यंत्र के सामने विशेष मंत्रो का उच्चारण 108 बार करें। यह उपासना धनतेरस से लेकर दिवाली तक की जाती है। ऐसा करने से जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं रहता, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार में वृद्धि होती है

धनतेरस का मह्त्व व कहानी

कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व हर साल दिवाली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन यमराज और भगवान धनवंतरी के साथ ही मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का महत्व है की पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर सागर मंथन के बाद प्रकट हुए। ऐसी मान्यता है कि भगवान धनवंतरी भगवान विष्णु के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था। भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। भगवान धन्वन्तरी चुकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ऐसी मान्यता है की इस अवसर पर बर्तन खरीदना चाहिए। मान्यतानुसार इस दिन की गई खरीददारी लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करती है।ऐसा मान्यता है की इस दिन भगवान कुबेर की पूजा करने पर वह प्रसन्न होता है बताया जाता है की धन के देवता कुबेर और म्रत्यु के देवता की इस दिन पूजा करने का विधान है उतर दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है इस स्थान को जितना हो सके खली रखे और सुबह पानी से धोकर साफ करे फिर ताबे के बर्तन में गंगा जल लेकर उतर दिशा और तिजोरी में छिड़काव करे इस उपाय से कुबेर के स्वागत की तैयार होती है माँ लक्ष्मी और कुबेर जी का चित्र अथवा श्री रूप उतर दिशा की और स्थापना करे इससे उतर सक्रिय होगी एव धन आगमन में आने वाली समस्त बाधाओ का नास होगा

धनतेरस पर क्यू करते है खरीददारी का मह्त्व

दीवाली से 2 दिन पहले लोग धनत्रयोदशी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इसे धनतेरस के रूप में पूजा जाता हैं धन और वैभव देने वाली इस त्रयोदशी का विशेष महत्व माना गया है लोग इस दिन गहनों और बर्तनों की खरीददारी करते हैं .ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु लंबे समय तक चलती हैं और वस्तु शुभ फल प्रदान करती है लेकिन अगर पीतल की खरीद-दारी की जाए तो इसका तेरह गुना अधिक लाभ मिलता है कहा जाता है कि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है। भगवान धनवंतरी को नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में उन्होंने शंख और चक्र धारण किए हुए हैं, दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है।

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