December 4, 2016
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शरद पूर्णिमा का व्रत विधि कथा और महत्व

शरद पूर्णिमा का व्रत विधि कथा और महत्व Sharad Purnima Vrat Puja Vidhi Katha Kavita In Hindi

आश्विन मास कि पूर्णिमा सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है और इस पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रुप में मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा को “कोजागरी पूर्णिमा” के नाम से भी जाना जाता है और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस पूर्णिमा को आरोग्य हेतु फलदायक माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं।कि इस पूर्णिमा को चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है।

पौराणिक मान्यताएं एवं शरद ऋतु, पूर्णाकार चंद्रमा, संसार भर में उत्सव का माहौल। इन सबके संयुक्त रूप का यदि कोई नाम या पर्व है तो वह है ‘शरद पूर्णिमा‘ कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रात:काल में व्रत कर अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने की किवदंती प्रसिद्ध है रात्रि के समय खीर को चंद्रमा कि चांदनी में रखकर उसे प्रसाद-स्वरूप ग्रहण किया जाता है।

शरद पूर्णिमा का महत्व Sharad Purnima ka Mahatva Important Value Or Manyata

मान्यता अनुसार चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा भोजन में समाहित हो जाती हैं जिसका सेवन करने से सभी प्रकार की बीमारियां आदि दूर हो जाती हैं खीर को चांदनी के में रखकर अगले दिन इसका सेवन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है इस व्रत को मुख्य रुप से स्त्रिया ही करतीं है इस दिन जागरण करने वाले की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है शरद पूर्णिमा के विषय में विख्यात है, कि इस दिन कोई व्यक्ति किसी अनुष्ठान को करे, तो उसका अनुष्ठान अवश्य सफल होता है।

Sharad Purnima Vrat Puja Vidhi Katha Kavita In Hindi

तीसरे पहर इस दिन व्रत कर हाथियों की आरती करने पर उतम फल मिलते है इस दिन के संदर्भ में एक मान्यता प्रसिद्ध है, कि इस दिन भगवान श्री कृ्ष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी अपने हाथों में वर और अभय लिए घूमती हैं। इस दिन वह अपने जागते हुए भक्तों को धन-वैभव का आशीष देती हैं।

शरद पूर्णिमा व्रत विधि व्रत कैसे करें – Sharad Purnima Vrat Vidhi Katha or Vart Kaise Kren Hindi

Sharad Purnima Date 2016

वर्ष 2016 में शरद पूर्णिमा 15 अक्तूबर 2016 , को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और इस दिन चन्द्रमा व भगवान विष्णु का पूजन, व्रत, कथा की जाती है। इस दिन श्रीसूक्त, लक्ष्मीस्तोत्र का पाठ करके हवन करना चाहिए। इस विधि से कोजागर व्रत करने से माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं तथा धन-धान्य, मान-प्रतिष्ठा आदि सभी सुख प्रदान करती हैं। शाम के समय चन्द्रोदय होने पर चांदी, सोने या मिट्टी के दीपक जलाने चाहिए। इस दिन घी और चीनी से बनी खीर चन्द्रमा की चांदनी में रखनी चाहिए। जब रात्रि का एक पहर बीत जाए तो यह भोग लक्ष्मी जी को अर्पित कर देना चाहिए।

शरद पूर्णिमा व्रत कथा – Sharad Purnima Vrat Katha

शरद पूर्णिमा के सम्बन्ध में एक दंतकथा अत्यंत प्रचलित है। कथानुसार एक साहूकार की दो बेटियां थी और दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थी| बड़ी बेटी ने विधिपूर्वक व्रत को पूर्ण किया और छोटी ने व्रत को अधूरा ही छोड़ दिया। फलस्वरूप छोटी लड़की के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते थे। एक बार बड़ी लड़की के पुण्य स्पर्श से उसका बालक जीवित हो गया और उसी दिन से यह व्रत विधिपूर्वक पूर्ण रूप से मनाया जाने लगा। इस दिन माता महालक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।इस प्रकार प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। इससे प्रसन्न हुईं माँ लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं और शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।



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