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जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की संरचना ,समितिया,शाखाए और उनकी कार्य प्रणाली

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Rajasthan जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की संरचना ,समितिया और उनकी कार्य प्रणाली

Rajasthan में पीने के पानी का प्रबन्धन करना हमारे प्रान्त की परम्परा रही है राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में रह रही जनता पिने के लिए पानी दूर दूर से लेकर आती हैं लेकिन स्वतंत्रता के पश्चात सरकार ने इस क्षेत्र में अपना काफी योगदान दिया | प्रारम्भ मे यह कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीन था। बाद में प्रान्त की परिस्थतियां एवं इस क्षेत्र में अधिक कार्य की आवश्यकता को देखते हुये वर्ष 1965 में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की स्थापना हुई। आवश्यकता तथा कार्यभार के संदर्भ में क्रमश: विभाग का विस्तार हुआ तथा वर्तमान स्थिति सामने आई।

वर्तमान मे विभाग मुख्य दो भागो में संरचित है :

1- राजस्थान जलप्रदाय एवं सीवरेज प्रबन्ध मण्डल
2- जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग

राजस्थान जल प्रदाय एवं सीवरेज प्रबन्ध मण्डल – Rajasthan Water Supply and Sewerage Management Board

राजस्थान जलप्रदाय एवं सीवरेज प्रबन्ध मण्डल का प्रमुख कार्य विभागीय गतिविधियों का प्रबन्ध,नीतिगत निर्णय, विभिन्‍न योजनाओं की स्वीकृति, धन प्रबन्धन आदि है। संदर्भित बोर्ड के अध्यक्ष माननीय मंत्री महोदय, जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग है और इस बोर्ड में वित्त विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, आयोजना विभाग, पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग का प्रतिनिधित्व है। विभाग के तकनीकी सदस्य, वित्तिय सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी और अन्य मुख्य अभियन्ता इसके सदस्य है।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की मुख्य समितियां – PHED Main Committees

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की मुख्य समितियां निम्न प्रकार है।
1- नीति निर्धारण समिति
2- एमपावर्ड बोर्ड समिति
3- वित्त समिति
4- तकनीकी समिति
5- स्टॉफ समिति

1- नीति निर्धारण समिति – नीति निर्धारण समिति के अध्यक्ष माननीय मंत्री महोदय, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग है और इसके सदस्यो में शासन प्रमुख सचिव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, विभाग के मुख्य अभियन्ता और वित्तीय सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी है । इस समिति में वित्त एवं आयोजना विभाग का प्रतिनिधित्व भी होता है। नीति निर्धारण समिति नीति विषयक मामलों पर चर्चा कर उन्हे निर्णित करती है और इसी समिति के द्वारा निर्णित नीति पर विभाग के कार्यकलाप आधारित है। रु. 25 करोड से अधिक लागत की योजनाओं एवं योजना के प्रकार मे परिवर्तन को इस समिति के द्वारा स्वीकृति दी जाती है।

2- एमपावर्ड बोर्ड समिति – इस समिति के अध्यक्ष माननीय राज्य मंत्री महोदय जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग है और समिति में शासन प्रमुख सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग हैं। इसमें आयोजना विभाग तथा वित्त विभाग का भी प्रतिनिधित्व होता है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियन्ता और वित्तिय सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी इसके सदस्य होते है। रु. 5 करोड से अधिक परन्तु रु. 25 करोड लागत तक की योजनाओं को इस समिति के द्वारा स्वीकृति दी जाती है।

3- वित्त समिति – शासन प्रमुख सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग इस समिति के अध्यक्ष है एवं बोर्ड के वित्तिय सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी एवं विभाग के मुख्य अभियन्तागण इस समिति के सदस्यगण है । इस समिति में वित्त विभाग का भी प्रतिनिधित्व है । यह समिति उपापन (प्रोक्‍योरमेट) के सभी मामले हेतु सक्षम है। रु. 5 करोड लागत तक की योजनाओं को इस समिति द्वारा स्वीकृति दी जाती है।

4- तकनीकी समिति – तकनीकी समिति में विभाग के एक मुख्य अभियन्ता जो बोर्ड के तकनीकी सदस्य है इस समिति के अध्यक्ष है एवं बोर्ड के वित्तिय सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी एवं मुख्य अभियन्तागण इस समिति के सदस्यगण है। तकनीकी समिति को तकनीकी विषयकों के निस्तारण का अधिकार है और तकनीकी स्वीकृति दिये जाने के लिये यह समिति पूर्ण रुप से सक्षम है। अन्य मामले तकनीकी समिति अपने स्तर पर परिक्षण कर उन्हे स्वीकृति के लिये वित्‍त समिति / निति निर्धारण समिति / प्रशासनिक विभाग को प्रस्तुत करती है।

5- स्टॉफ कमेटी – वित्त सचिव स्टॉफ कमेटी के अध्यक्ष है और सचिव, जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग, तकनीकी सदस्य, वित्तिय सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी एवं मुख्य अभियन्ता (मुख्यालय) इसके सदस्य है। यह समिति समय-समय पर नये पदों के सृजन और पदों सम्बन्धी रिव्यू का कार्य करती है। वर्तमान मे नये पदो का स़जन एवं पदो के रिव्‍यू संबधित कार्य सीधे ही मुख्‍य अभियन्‍ता (प्रशासन) एवं प्रशासनिक विभाग के माध्‍यम से किया जा रहा है ।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की संरचना :The Composition of the PHED

र्तमान मे शासन प्रमुख सचिव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग इस विभाग के प्रशासनिक मुखिया है।

विभाग में मुख्य अभियन्ता (8 पद),

अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता(25 पद विभाग मे एवं 6 पद एक्‍सकेडर/ प्रतिनियुक्ति के अन्‍य विभागो मे),

अधीक्षण अभियन्ता(91 पद विभाग मे एवं 5 पद एक्‍सकेडर/ प्रतिनियुक्ति के अन्‍य विभागो मे),

अधिशासी अभियन्ता(416 पद विभाग मे एवं 52 पद एक्‍सकेडर/ प्रतिनियुक्ति के अन्‍य विभागो मे),

सहायक अभियन्ता(1842 पद विभाग मे एवं 150 पद एक्‍सकेडर/ प्रतिनियुक्ति के अन्‍य विभागो मे),

एवं कनिष्ठ अभियन्ता (1136 पद), तथा रसायनज्ञ , भूजल वैज्ञानिक, विधि अधिकारी, कार्मिक अधिकारीगणों के द्वारा मुख्‍य विभागीय कार्य संपादित किया जाता है।

मुख्य अभियंताओं का कार्य क्षेत्र –

1- मुख्‍य अभियंता (प्रशासन) , जयपुर : राजपत्रिक एवं अराजपत्रिक संवर्ग का समस्‍त संस्‍थापन कार्य, वादकरण एवं जॉच संबधी कार्य, सर्तकता,प्रशिक्षण सैल का कार्य, गुणवत्‍ता नियंत्रण प्रकोष्‍ठ (समस्‍त वृहद परियोजनाओं सहित)

2- मुख्य अभियंता (तकनीकी) एवं पदेन तकनीकी सदस्‍य, आरडब्‍ल्‍यूएसएसएमबी, जयपुर : तकनीकी सदस्‍य, आरडब्‍ल्‍यूएसएसएमबी के समस्‍त कार्य, मानकीकरण, वि‍शि‍‍षिठियॉ एवं डिजाईन प्रकोष्‍ठ से संबिधत समस्‍त कार्य, बी एस आर निर्धारण का कार्य

3- मुख्य अभियंता ( मुख्यालय), जयपुर : सभी शहरी जल योजनाओ से संबधित समस्‍त कार्य (JNNURM / UIDSSMT / RUIDP) एवं नोडल अधिकारी शहरी योजनाये संवैदको का पंजीकरण, वस्‍तु व्‍यवस्‍था सैल का समस्‍त कार्य, बजट प्रकोष्‍ठ का कार्य

4- मुख्य अभियंता (ग्रामीण), जयपुर : राज्‍य की समस्‍त ग्रामीण जलप्रदाय योजनाओं से संबधित समस्‍त कार्य एवं नोडल अधिकारी ग्रामीण योजनाये ड्रिलिंग विंग का कार्य NRDWP संबधित समस्‍त कार्य

5- मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना), जयपुर : सभी वृहद परियोजनाओं जिनकी लागत 50 करोड से अधिक है, से संबधित समस्‍त कार्य ( मुख्‍य अभियंता जोधपुर, मुख्‍य अभियंता पीएमयू नागौर एवं मुख्‍य अभियंता, उदयपुर को आवंटित कार्यो को छोडकर ) नोडल अधिकारी वृहद परियोजनाये

6- मुख्य अभियंता (परियोजना), जोधपुर : जोधपुर संभाग से संबिधत समस्‍त वृहद परियोजनाओ का कार्य

7 – मुख्य अभियंता, पीएमयू नागौर (मु. अजमेर ) : नागौर जिले की वृहद परियोजनाओ का कार्य ( नागौर लिफट परियोजना का प्रथम चरण),
JICA पोषित परियोजना का समस्‍त कार्य
8 – मुख्य अभियंता, उदयपुर : उदयपुर संभाग (उदयपुर, डूंगरपुर, बॉसवाडा, राजसमंद, चित्‍तोडगढ,एवं प्रतापगढ जिले) से संबधित समस्‍त योजनाओ का कार्य (वृहद परियोजनाओं सहित)

अतिरिक्त मुख्‍य अभियंताओं का कार्यक्षेत्र जिले अनुसार :

1- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र प्रथम, जयपुर : इनके अधीन सीकर, दौसा एवं झुन्झुनु जिले है।
2- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र दि‍तीय, जयपुर : इनके अधीन जयपुर जिले की शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल योजनाओ का कार्य है।
3- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र भरतपुर : इनके अधीन भरतपुर, सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर जिले है।

4- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र कोटा : इनके अधीन कोटा, बारां, बूंदी व झालावाड़ जिले है।
5- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र प्रथम, जोधपुर : इनके अधीन जोधपुर, एवं पाली जिलें है।
6- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र दि‍तीय, जोधपुर : इनके अधीन सिरोही, जालौर, बाड़मेर तथा जैसलमेर जिलें है।

7- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र बीकानेर : इनके अधीन बीकानेर, चुरू, हनुमानगढ़ एवं गंगानगर जिलें हैं।

8- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र अजमेर : इनके अधीन अजमेर, भीलवाडा़, टोंक व नागौर जिले है।
9- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, परियोजना क्षेत्र जयपुर :इनके अधीन जयपुर एवं टोंक जिले की वृह्द परियोजनाओं सम्‍बन्‍धी कार्य है ।

10- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (परियोजना) , अजमेर : इनके अधीन अजमेर एवं भीलवाडा जिले की वृह्द परियोजनाओं सम्‍बन्‍धी कार्य है ।

11- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (परियोजना) , भरतपुर : इनके अधीन भरतपुर, धौलपुर ,करौली एवं सबाईमाधोपुर जिले की वृह्द परियोजनाओं सम्‍बन्‍धी कार्य है ।

12- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (परियोजना) , चुरू : इनके अधीन चूरू, बीकानेर, सीकर एवं झूझंनू जिले की वृह्द परियोजनाओं सम्‍बन्‍धी कार्य है।

13- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (परियोजना) , बाडमेर : इनके अधीन जैसलमेर, बाडमेर जिले की वृह्द परियोजनाओं सम्‍बन्‍धी कार्य है।

14- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एन सी आर), अलवर : इनके अधीन अलवर जिले का कार्य (एनसीआर के कार्यो सहित) है

15 – अतिरिक्त मुख्य अभियंता, ड्रिलिंग क्षेत्र जयपुर : इनके द्वारा विभागीय रिगों से नलकूप बनाने का कार्य देखा जाता है।

16 – अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ग्रामीण), जयपुर : यह मुख्य अभियन्ता (ग्रामीण) के कार्यो में सहयोग करने के साथ साथ कम्प्युटराईजेशन कार्य के नोडल अधिकारी हैं।

17- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (शहरी), जयपुर : यह मुख्य अभियन्ता (मुख्यालय) के कार्यो में सहयोग करते है।

18- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (गुणवत्‍ता नियन्त्रण), जयपुर : इनके द्वारा मुख्‍य अभियंता (प्रशासन) के अधीन गुणवत्‍ता नियन्त्रण प्रकोष्‍ठ का कार्य देखा जाता है।

19- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (विजीलेस), जयपुर : इनके द्वारा मुख्‍य अभियंता (प्रशासन) के अधीन विजीलेस प्रकोष्‍ठ का कार्य देखा जाता है।

20- अतिरिक्त मुख्य अभियंता (मानकीकीण एवं डिजाईन), जयपुर : इनके द्वारा विभाग मे डिजाईन, स्‍पेशिफिकेशन एवं मानकीकरण का कार्य देखा जाता है। यह मुख्‍य अभियंता(तकनीकी) एवं पदेन तकनीकी सदस्‍य के अधीन कार्यरत है।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शाखाए – PHED Branches 

जल की रासायनिक एवं जीवाणु परीक्षण जांच, वितरित किये जा रहे पेयजल की गुणवत्ता जांच एवं परीवीक्षण हेतु विभाग में रसायनज्ञ शाखा कार्यरत है। इस कार्य हेतु प्रान्त के सभी 33 जिलों में प्रयोगशालाएं कार्यरत है। इस शाखा में निम्न पदों पर अधिकारी कार्यरत है।

1- मुख्य रसायनज्ञ
2- अधीक्षण रसायनज्ञ
3- वरिष्ठ रसायनज्ञ
4- कनिष्ठ रसायनज्ञ
5- जीव विज्ञानी

जल संरक्षण उपाय – Water Conservation Techniques

सुरक्षित पानी जीवन का मूल का आधार

स्वच्छ एवं सुरक्षित जल अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यकता है। गंदा व प्रदूष्रित जल बीमारियों फैला सकता है। सभी प्रकार की घरेलु आवश्यकताओं के आधार पर सामान्यता प्रतिदिन एक आदमी को 40 लीटर पानी की आवश्यकता होती है किन्तु अकाल जैसी स्थिति में दैनिक उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति कम से कम 15 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

हमारे देश में सुरक्षित पानी का संकट क्यो आओ जाने ?

  • वर्षा की कमी
  • वर्षा-जल के संरक्षण की कमी
  • सिंचाई/तराई में अधिक उपयोग
  • भूजल का पुनर्भरण कम व दोहन अधिक

गर्मियों के कम से कम 5 महिनों के लिये सुरक्षित पानी हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए। इसके लिए घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर कई उपाय सम्भव है जैसे बरसात का पानी इक्ट्ठा करना आदि।

घरेलु स्तर पर उपाय :

राजस्थान में अन्य राज्यों से कम वर्षा होती है जिसके फलस्वरुप पूरे वर्ष के लिए पर्याप्त जल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसके अतिरिक्त हम वर्षा के जल को व्यर्थ में बहने देतें है। पानी की इस कमी को हम अपने प्रयासों से काफी हद तक पूरी कर सकते है जैसे –
· छत से बरसात के पानी को व्यर्थ न बहने दे। वर्षा काल में छतों की सफाई करें तथा छत के ढलान वाली ओर पाइप लगाकर यह पानी टांके/कुण्ड में सग्रह करें।

छत पक्की न हो तो खेत या खुले मैदान में टांका बनवाकर पानी इक्ट्ठा करें।
· यदि टांका बनाना सम्भव न हो तो मुर्गाजाली टांका या प्लास्टिक टैक इस्तेमाल करें।

राजस्थान में होने वाली औसत बरसात से एक पक्के मकान की छत (लगभग 25 वर्ग मीटर) से इतना पानी संग्रह हो सकता है जिससे 10 लोगों के परिवार की 200 से ज्यादा दिनों तक का खाना पकाने एवं पीने के पानी की आवश्यकता पूरी हो सकती है।

पानी की बून्द-बून्द कीमती है। जल का दुरुपयोग ना करें।

जल प्रकृति की अनमोल धरोहर है। यदि जल व्यर्थ बहेगा तो आने वाले समय में पानी की कमी एक गहन संकट बन जाएगी। समझ्दारी से जल का उपयोंग करें तो जल की उपलब्धता लम्बे समय तक बनी रहेगी।

जल संरक्षण के सामुदायिक ,ग्राम स्तर पर उपाय :

  • पानी की आपूर्ति प्राय नलों , हैण्डपम्पों, तालाबों, कुओं, आदि से करते है। इन स्त्रोतों से पानी का उपयोग सही व स्वच्छ तरीके से हो इसके लिए आवश्यक है कि ग्राम स्तर पर सभी लोग मिलकर एक समिति का गठन करें।
  • यह समिति समय-समय पर बैठक करे तथा इस विषय पर विचार विमर्श के कि गांव की जनसंख्या के अनुसार कुल कितने पानी की आवश्यकता है।
  • यह आवश्यकता किन स्त्रोतों से पुरी हो सकती है। गांव सुरक्षित पानी की आवश्यकताओं के अनुसार पेयजल एवं खाना पकाने के लिये अपने क्षेत्र में उपलब्ध जल स्त्रोंतों की पहचान करें।
  • इन जल स्त्रोंतों का उपयोग केवल पीने व खाना पकाने के लिए ही करें।
  • अन्य आवश्यकताओं के लिये शेष जल स्त्रोतों को परखें।
  • जल के उपयोग पर निगाह रखे व आवश्यक कार्यवाही करें।
  • समिति समय-समय पर सामूहिक स्तर पर धन एकत्र करे जिससे हैण्डपम्प की मरम्मत, कुएं/तालाब को गहरा करवाना, आवश्यकता होने पर टैंकरों से पानी मंगवाना, टांका बनवाना इत्यादि कार्य किये जा सकें।

स्व्च्छ पानी की गुणवत्ता :

पानी में प्रदूषण न हो इसके लिए सामुदायिक स्तर पर उपाय करने चाहिए।

  • हैण्डपम्प से जल निकास के लिए पुख्ता नालियां बनाएं एवं उसके पास गन्दगी न होन दें।
  • खुले कुएं के पानी को ब्लीचिंग पावडर डालकर नियमित रुप से जीवाणु रहित कर पानी को काम में लें।
  • प्राइवेट टैंकरों द्वारा वितरित जल में वितरण से आधा घन्टा पूर्व टैंकर की क्षमता के अनुसार ब्लीचिंग पावडर का घोल बनाकर डालें।
  • जल संग्रह की टंकी के आस पास स्वच्छ वातावरण रखें।
  • एक अनुभवी पानी के ठेकेदार की पहचान करके रखे जो जरुरत के समय सामुदायिक टांके व अन्य टैंक में आपके लिये तुरन्त पानी की व्यवस्था कर सके।

किसी भी प्रकार के तकनीकी मार्गदर्शन के लिये आप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग राजस्थान सरकार की निम्न संस्थाओं से सम्पर्क कर सकते हैं :

-जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग

-जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण

-कृषि विभाग

-जल एवं मृदा संरक्षण विभाग

-पंचायती राज संस्थाएं

सूचना का अधिकार- Right to Information

    1. दिशा निर्देश
   2. लोक सूचना अधिकारी बाबत जानकारी
  3. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग का परिपत्र
  4.
  5. सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 की सूचना
  6.
  7. प्रशासनिक सुधार एवं समन्‍वय विभाग (अनुभाग-1)  का परिपत्र दिनांक 06/01/2012 
  8. प्रशासनिक सुधार विभाग का परिपत्र दिनांक 12/07/2012
  9. प्रशासनिक सुधार विभाग का परिपत्र दिनांक 27/07/2012
  10. प्रगति विवरणिका
  11. Shedule of Power of All PHED Officer for RTI Dhara 4
  12. Shedule of Power Ammendments

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