December 9, 2016
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महात्मा गांधी पर कविता Poem on Mahatma Gandhi, Poetry on Bapu

महात्मा गांधी पर कविता Poem on Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी पर कविता Poem on Mahatma Gandhi

महात्मा गाँधी जी पर कविता Poem on Gandhi in Hindi

महात्मा गाँधी जी पर कविता भारत के सम्मान है गाँधी।

  • भारत के सम्मान है गाँधी।इस युग कि पहचान हैं गाँधी।।
  • चौराहों पर खड़े है गाँधी।मैदानो के नाम है गाँधी।।
  • दीवारों पर टंगे है गाँधी।पढने -पढ़ाने में है गाँधी।।
  • राजनीति में भी है गाँधी।मज़बूरी का नाम हैगाँधी।।
  • टोपी कि एक ब्रांड है गाँधी।वोट में गांधी ,नोट में गाँधी।।
  • अगर नहीं मिलते तो वह है।जनमानस की सोच में गांधी।।

कविता महात्मा गांधी Poetry Mahatma Gandhi


Poetry Mahatma Gandhi in Hindi कविता महात्मा गांधी

  • गांधी जी ने की थी जो लड़ाई,न मारी किसी को गोली न दी गाली….
  • प्रेम और अहिंसा के बल से,दिला दी उन्हों ने आजादी….
  • चले गए अंग्रेज छोड़ के ये देश ,बापू हो गये दुनिया के प्यारे….
  • बापू ने बोली ग़ली -ग़ली पर एक ही बोली,हिन्दुस्थान हमारा सबसे न्यारा….

गांधी पर कविता Poem on Gandhi

Poem on Gandhi गांधी पर कविता

गांधी पर कविता  अब तुम मान जाओ…

  •   अब तुम मान जाओ कि तुम मर चुके हो मोहनदासवरना बड़े-बड़ों की लाख कोशिशों के बावजूद
  • आज किसी गली से इकलौता पागल न गुजरता राम धुन गाते हुएगांधीवाद को यूं न घसीटा जाता सरेआम
  • आक्रोश को अहिंसा का मुखौटा पहनाते हुएन बेची जाती दो टके में ईमान, भरे बाजार में
  • तुम्हारे आदर्शों का चादर चढ़ाते हुएवरना दो अक्टूबर को ही केवल याद न किया जाता
  • तुम्हें दिलों में जिंदा रखने की झूठी कसमें खाते हुएयूं रोज हजार बार तुम्हें दफनाया जाता है
  • तुम्हें अभिदान के तख्ते पर चढ़ाते हुए इसीलिएअब मान जाओ कि तुम मर चुके हो मोहनदास
  • और यह वादा है हमारा कि हम चंद लम्हों में हीतुम्हारे वजूद को खत्म कर देंगे

महात्मा गाँधी जी पर कविता गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं Mahatma Gandhi Gandhi poetry are smiling

महात्मा गाँधी जी पर कविता गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं

  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    ग्राम प्रधान, बीडीओ, तहसीलदार से लेकर
    डीएम, सचिव और मंत्री जी
    सभी रिश्वत खा रहे हैं।
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और दलाल बन बैठे वकील, जज साहिबान
    अदालतों मे हत्यारों-अपराधियों को बेझिझक छुड़ा रहे हैं।
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और आईजी, डीआईजी से लेकर
    एसपी, एसएसपी और थानेदार तक
    चोर-उचक्कों, डाकुओं को निर्दोष,
    तो मासूम भोले-भाले लोगों को शातिर अपराधी बता
    एनकाउंटर का खेल चला रहे हैं।
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और बड.ी-बड.ी अटटालिकाओं में बैठे
    सेठ-साहूकार पब्लिक को चूतिया बना रहे हैं।
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और धरती के भगवान बन बैठे डाक्टर साहब
    सरकारी अस्पताल छोड., नर्सिंग होम में
    सौ का हजार दस हजार बना रहे हैं।
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और तीस परसेंट ओवरडोज के चक्कर में इंजीनियर साहब
    रददी माल को एकदम परफेक्ट बता
    कान्ट्रेक्ट पर कान्ट्रैक्ट पास किए जा रहे हैं।
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और उनकोे मुस्कुराता देख, हम भी जम के मुस्कुरा रहे हैं
    धोती कुर्ता स्वदेशी कौन कहे
    विदेशी ब्रांड, सुपर-ब्रांड के चक्कर में, सब पगलाए जा रहे हैं
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    नेता जी घोटालों की रिटेल चेन चला रहे हैं
    और देश निकाला देकर गांधी जी को ही स्विस बैंक भेजवा रहे हैं
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    धर्म जाति के नाम पर बंटे देश में
    स्वार्थवश गुलाब के फूल के साथ मिठाई के डिब्बे
    तो निःस्वार्थ भाव से चाकू तलवार गोली के गिफ्ट
    खुद-ब-खुद पहुंचाए जा रहे हैं
  • नोटों पर छपे गांधी जी मुस्कुरा रहे हैं
    और लगातार मुस्कुरा रहे हैं
    मैने सोचा क्या वाकई मुस्कुरा रहे हैं
    नोट को अलट-पलट कर देखा तो मुस्कुराते दिखे
    ध्यान से झांक कर देखा तो भी मुस्कुराते दिखे
  • मैने सोचा राजघाट जाकर सीधे बापू से पूंछा जाए
    आखिर क्यों मुस्कुरा रहे हैं,
    जबकि देश और देशवासी सीधे गर्त की तरफ जा रहे हैं
  • राजघाट पहुंचा
    देखा कि बापू की समाधि के चारों तरफ पानी ही पानी जमा है
    सोचा बरसात का पानी होगा
    पूंछा तो पता चला पानी गिरा ही नहीं, और नल वगैरह भी ठीक है
    फिर ये पानी आया कैसे
  • ध्यान से देखा तो चौंक गया
    बापू रो रहे थे
    समाधि पर लिखे ’हे राम’ के नीचे से आंसू टपक रहे थे
  • मैने बापू से पूंछा
    यहां आप रो रहे हैं
    लेकिन बाकी जगह तो मुस्कुरा रहे हैं
    क्यों
  • बापू ने कहा – बेटा क्या करूं
    मजबूरी का नाम महात्मा गांधी है
    न चाहते हुए भी पहले राष्ट्रपिता बना दिया
    फिर हर जगह हंसते हुए दिखा दिया
    मैं तो 47 से ही रो रहा हूं
  • जब
    देश बंटा, देश के लोग बंटे
    आचार विचार व्यवहार बंटे
  • आजाद देश में
    जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन में
    जनता पर ही अत्याचार बढे.
    फिरंगियों ने नहीं
    अपनों ने ही ’अपनों के लिए’ अपनों का खून लिया चूस
    फिर सब कुछ ठीक दिखे, इसलिए मुझे हर जगह दिया ठूंस
  • मुझे जहां जितना हंसाया
    मैं वाकई में वहां उतना ज्यादा रोया
  • आज मैं तेरा शुक्रगुजार हूं ’नाथू’
    तूने मुझे पल-पल मरने से बचाया
    बस मैं उस दिन को कोसता हूं
    जब मैनें कहा था कि –
    ’मेरी आत्मा इस देश के कण-कण में बसती है’
    कहते-कहते
    ¬’हे राम’ के नीचे से आंसुओं  का सैलाब सा बहने लगा
  • मैं बैठा रहा, सोचता रहा
  • शायद
    अब महात्मा की आत्मा
    देश के कण-कण में नहीं
    केवल राजघाट पर ही बसती है

महात्मा गाँधी जी पर कविता


महात्मा गाँधी जी पर कविता

  • महात्मा गाँधी
    सत्य और अहिंसा की मूर्ति
    जिनके सत्याग्रह ने
    साम्राज्यवाद को भी मात दी
    जिसने भारत की मिट्टी से
    एक तूफान पैदा किया
  • जिसने पददलितों और उपेक्षितों
    के मौन को आवाज दी
    जो दुनिया की नजरों में
    जीती-जागती किंवदंती बना
  • आज उसी गाँधी को हमने
    चौराहों, मूर्तियों, सेमिनारों और किताबों
    तक समेट दिया
    गोडसे ने तो सिर्फ
    उनके भौतिक शरीर को मारा
    पर हम रोज उनकी
    आत्मा को कुचलते देखते हैं
    खामोशी से।

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