December 7, 2016
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How to Nagpanchami Special Celebration

How to Nagpanchami Special Celebration – नागदेवता का करें पूजन

Nagpanchami Special Celebration for India

How to Nagpanchami Special Celebration

नागपंचमी पर नागदेवता का पूजन किया जाना चाहिए। साक्षात नागदेवता पर सुगंध और द्रव्य चढ़ाने के बजाय उनकी प्रतिमा पर इन चीजों का अर्पण करना चाहिए। सीधे नागदेवता पर ये चीजें अर्पित करने से वे कष्ट सहते हैं। हमें नागपंचमी के मर्म को समझते हुए उनकी प्रतिमा का पूजन करना चाहिए।

गरुड़ पुराण कहती है कि नागपंचमी के दिन घर के दोनों ओर नाग देवता का चित्र खींचकर अनंत सहित प्रमुख नागों का पूजन करना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं। अत: पंचमी को नागों की तिथि माना गया है। स्कंदपुराण में कहा गया है कि श्रावण पंचमी को नाग देवता को पूजने से मनोकामना पूरी होती है और अनिष्ट टल जाता है। नारद पुराण में सर्प दंश से बचने के लिए कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नाग व्रत करने का विधान सुझाया गया है। इसके अलावा परिवार को सर्पदंश से सुरक्षा देने के लिए भादौ कृष्ण पंचमी को भी नाग देवता का पूजन किया जाना चाहिए।
राजस्थान में नाग पंचमी अर्थात श्रावण कृष्ण पंचमी को नागदेव का पूजन होता है। नाग के प्रतीक के रूप में चांदी या तांबे की सर्प प्रतिमा और वे भी न हों तो रस्सी में सात गांठ लगाकर नाग देव को प्रतीक मानकर पूजा की जाती है। बहुत से श्रद्धालु सर्प की बांबी का पूजन भी करते हैं। वैसे तो पूरे श्रावण मास में ही धरती की खुदाई करना निषिद्ध है लेकिन नागपंचमी पर खासकर इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। इस दिन धरती की खुदाई करना अशुभ माना जाता है।
नागपंचमी पर नाग पूजन के संदर्भ में एक पौराणिक कथा है कि जब नागों ने नागमाता कदूर के द्वारा एक छल में भागीदारी से मना कर दिया तो उन्होंने नागों को श्राप दिया था कि पांडवों के वंशज जनमेजय द्वारा जब सर्प यज्ञ किया जाएगा, तब तुम सभी उस हवन अग्नि में जल जाओगे। यह सुन सभी नाग घबरा गए और वासुकि के नेतृत्व में ब्रह्मलोक ब्रह्माजी के पास पहुंचे। ब्रह्माजी ने उन्हें कहा कि यायावर वंश में एक तपस्वी जरतकारू नामक ब्राह्मण का जन्म होगा। उसके साथ तुम्हारी बहन का विवाह होगा। उन दोनों के घर आस्तिक नामक पुत्र जन्म लेगा, वह जनमेजय के यज्ञ से तुम्हारी रक्षा करेगा।
ब्रह्माजी ने श्रावण शुक्ल पंचमी को यह वरदान दिया था और आस्तिक मुनि ने भी इसी दिन नागों की रक्षा की थी इसलिए इस तिथि की महत्ता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक श्रावण शुक्ल पंचमी को व्रत रख नागों की पूजा करने से, बारह मास तक चतुर्थी तिथि को एक बार भोजन कर पंचमी को व्रत करने से एवं 12 प्रमुख नाग अनंत, वासुकि, शंख व पद्य, कंबल, कर्कोटक तथा अश्वतर, घृतराष्ट, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल का पूजन करने से जीवन में कृपा प्राप्त होती है। परिवार में सर्पभय दूर होता है और ऐसे जातक पर से वर्तमान में कालसर्पयोग हो तो वह भी क्षीण हो जाता है।
सर्प का प्रतीक रूप में पूजन श्रेष्ठ
वन्यजीवों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि सर्प को जबरदस्ती दूध पिलाने से उन्हें दर्द और बीमारी होती है। चूंकि लोग इस दिन सर्प का पूजन करना चाहते हैं इसलिए सपेरे सांप पकडकर उन्हें कैद में रखते हैं। हमें इस पर्व के मर्म तक पहुंचना चाहिए। यह पर्व हमारे जीवन में सर्प के महत्व को बताता है और इसलिए इस दिन सर्प की प्रतीक रूप में पूजा करना चाहिए ताकि नागदेवता को कोई कष्ट न पहुंचे। इस बात पर विचार जरूरी है कि हम जिनकी पूजा कर रहे हैं वे हमारे पूजन के लिए सपेरों की कैद में कितना कष्ट भुगतते हैं। प्रतीक रूप में पूजन सर्प को तमाम यातनाओं से मुक्त करता है। यही श्रेयस्कर भी है और पर्व का मर्म भी।

नागपंचमी पर यह करें
इस दिन नाग प्रतिमा या उनके रूप के दर्शन अवश्य करें। नागदेव का स्मरण कर उनके प्रतीक स्वरूप का पूजन करें। उनके निवास का प्रतीकात्मक पूजन करें। नाग देवता को सुगंध प्रिय है इसलिए सिर्फ पुष्प व चंदन से पूजन श्रेष्ठ है। कुरुकुल्ये हुं फट स्वाहा” का जाप करने से सर्पदोष दूर होता है।

प्रमुख नाग मंदिर
1 भुज, गुजरात- भुजिया पहाड़ी पर भजंग नाम का मंदिर है। यहां नाग पंचमी पर मेला लगता है। लोग श्रद्धा के साथ आते हैं।
2 मान्नारसला, केरल- अल्लीपे जिले में यह नागराज का मंदिर है। नवदंपति और संतान की कामना से लोग यहां आशीष लेने आते हैं। मनोकामना पूरी भी होती है।
3 नागरकोइल, तमिलनाडु- यहां नागराज के मंदिर के कारण ही इस जगह को यह नाम मिला। यह दक्षिण का छोर है।
4 तिरूनागेश्वरम, तमिलनाडु- इस मंदिर में शिव को नागेश्वर रूप में पूजा जाता है। यहां राहू का भी एक मंदिर है जिन्हें सर्पों का देवता माना जाता है।
5 नागपट्टीनम, तमिलनाडु- क्रिता युग में आदिशेष ने यहां भगवान विष्णु की तपस्या की थी। यहीं भगवान ने वरदान दिया था कि वे शेष को अपने शयन के लिए लेंगे।

 

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