December 3, 2016
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महात्मा गांधी जयंती पर भाषण, Mahatma Gandhi jayanti speech

महात्मा गांधी जयंती पर भाषण, Mahatma Gandhi jayanti speech

Mahatma Gandhi jayanti speech

इस लेख में महात्मा गांधी जी की जयंती पर छोटे छोटे भाषण दिये गये है | जो भाषण आसानी से पढ़े  जा सकते है |

गाँधी जयंती पर भाषण Mahatma Gandhi jayanti speech in hindi

  • सभी माननीयों, आदरणीय प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों आप सभी को नमस्कार। जैसा कि हम सभी जानते है कि हम सब यहाँ एक प्यारा उत्सव मनाने जुटे हैं जो गाँधी जयंती कहलाता है, इस अवसर पर मैं आप सब के सामने एक भाषण प्रस्तुतकर रहा हूँ। मेरे प्यारे दोस्तों, 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी का जन्मदिन था  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को श्रद्धांजलि देने के लिये हर वर्ष पूरे उत्साह के साथ हम इस दिन को मनाते है साथ ही साथ अंग्रेजो के  शासन से देश के लिये स्वतंत्रता संघर्ष के रास्ते में उनके हिम्मतपूर्णं कार्यों को याद करते हैं। पूरे भारत में एक बड़े राष्ट्रीय अवकाश के रुप में हम लोग गाँधी जयंती मनाते हैं। महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी है और वो बापू तथा राष्ट्रपिता के नाम से भी प्रसिद्ध है।
  • 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में भी मनाया जाता है क्योंकि अपने पूरे जीवन भर वह अहिंसा के उपदेशक रहे। 15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र सामान्य सभा द्वारा 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्ररीय अहिंसा दिवस के रुप में घोषित किया गया है। हम लोग हमेशा बापू को शांति और सच्चाई के प्रतीक के रुप में याद करते है । बापू का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के छोटे से शहर पोरबंदर में हुआ था जबकि उन्होंने अपने पूरे जीवनभर बड़े-बड़े कार्य किये। वह एक वकील थे और उन्होंने अपनी कानून की डिग्री इंग्लैंड से ली और वकालत दक्षिण अफ्रीका में किया। “सच के साथ प्रयोग” के नाम से अपनी जीवनी में उन्होंने स्वतंत्रता के अपने पूरे इतिहास को बताया है। जब तक की आजादी मिल नहीं गयी वह अपने पूरे जीवन भर भारत की स्वतंत्रता के लिये अंग्रेजी शासन के खिलाफ पूरे धैर्य और हिम्मत के साथ लड़ते रहे।
  • सादा जीवन और उच्च विचार सोच के व्यक्ति थे गाँधी जी जिसको एक उदाहरण के रुप में उन्होंने हमारे सामने रखा। वो धुम्रपान, मद्यपान, अस्पृश्यता और माँसाहारी के घोर विरोधी थे। भारतीय सरकार द्वारा उनकी जयंती के दिन शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। वो सच्चाई और अहिंसा के पथ-प्रदर्शक थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिये सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की। नयी दिल्ली के राजघाट पर इसे ढ़ेर सारी तैयारीयों के साथ मनाया जाता है जैसे प्रार्थना, फूल चढ़ाना, उनका पसंदीदा गाना “रघुपति राघव राजा राम” आदि बजाकर गाँधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। मैं आप सबसे उनके एक महान कथन को बाँटना चाहूँगा “व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वो जो सोचता है वही बन जाता है”।

Mahatma Gandhi jayanti speech in hindi

  • माननीय, आदरणीय प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों आप सभी को मेरा प्रणाम । मैं गाँधी जयंती के अवसर पर एक भाषण दे रहा हु। सबसे पहले मैं अपने टीचर को धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने इतने महान अवसर पर भाषण देने के लिये मुझे मौका दिया। जैसा कि हम सभी जानते है कि हर साल 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी का जन्मदिन मनाने के लिये हम सब इकट्ठा होते हैं। मेरे प्यारे दोस्तों, गाँधी जयंती केवल अपने देश में ही नहीं मनाया जाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में पूरे विश्व भर में मनाया जाता है क्योंकि वह अपने पूरे जीवनभर अहिंसा के एक पथ-प्रदर्शक थे।
  • उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है हालाँकि वह बापू और राष्ट्रपिता तथा महात्मा गाँधी के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इस दिन पर, नयी दिल्ली के राजघाट पर महात्मा गाँधी को उनके समाधि स्थल पर भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के द्वारा प्रार्थना, फूल, भजन आदि के द्वारा श्रद्धाजलि अर्पित की जाती है। गाँधी जयंती भारत के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में गाँधी को याद करने के लिये मनायी जाती है जिन्होंने हमेशा सभी धर्मों और समुदायों को एक नजर से सम्मान दिया। इस दिन पर पवित्र धार्मिक किताबों से दोहा और प्रार्थना पढ़ा जाता है खासतौर से उनका सबसे प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम”। देश में राज्यों के राजधानियों में प्रार्थना सभाएँ रखी जाती है। जैसा कि भारत सरकार के द्वारा इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में, सभी स्कूल, कॉलेज, कार्यालय आदि पूरे देश में बंद रहते हैं।
  • महात्मा गाँधी एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी को प्राप्त करने में बहुत संघर्ष किया और एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत के लिये आजादी प्राप्त करने के अहिंसा के अनोखे तरीके के केवल पथ-प्रदर्शक ही नहीं थे बल्कि उन्होंने दुनिया को साबित किया कि अहिंसा के पथ पर चलकर शांतिपूर्ण तरीके से भी आजादी पायी जा सकती है। वह आज भी हमारे बीच शांति और सच्चाई के प्रतीक के रुप में याद किये जाते हैं।

गाँधी जयंती पर भाषण Mahatma Gandhi jayanti par bhashan

  • माननीय, आदरणीय प्रधानाध्यापक, शिक्षक और मेरे प्यारे दोस्तों को मैं प्यार भरा नमस्कार करता हूं । मेरा नाम महेश कुमार सैनी है,  मेरे प्यारे दोस्तों, महात्मा गाँधी के जन्म दिवस, 2 अक्टूबर के इस शुभ अवसर को मनाने के लिये हम सब यहाँ इकट्ठे हुए हैं। इस दिन पर, भारत के राष्ट्रपिता का जन्म 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। ये उत्सव हमारे लिये बहुत मायने रखता है। महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी है,  ये राष्ट्रपिता, गाँधीजी और बापू के नाम से भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। गाँधी जयंती के रुप में देश में बापू के जन्म दिवस को मनाया जाता है जबकि पूरे विश्व में इसे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में मनाया जाता है।
  • बापू का जन्म देश के बहुत छोटे गाँव में हुआ था उनके कार्य बहुत महान थे जिसको पूरे विश्व में फैलने से कोई नहीं रोक सका। वह एक ऐसे व्यक्ति थे जो ब्रिटिश शासन से अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को आजादी दिलाने में भरोसा रखते थे। वह अहिंसा के पथ-प्रदर्शक थे, उनके अनुसार ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त करने का यही एकमात्र असरदार तरीका है। बापू एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने भारत की आजादी के संघर्ष में अपना पूरा जीवन दे दिया।
  • भारतियों के असली दर्द को महसूस करने के बाद, उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले के साथ कई सारे आंदोलनों में भाग लेना शुरु कर दिया। असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन वे अभियान है जो उन्होंने भारत की आजादी के लिये चलाये थे। वह कई बार जेल गये लेकिन कभी अपना धैर्य नहीं खोया और शांतिपूर्वक अपनी लड़ाई को जारी रखा। बापू का पूरा जीवन(वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी के लिये) देशभक्ति, समर्पण, अहिंसा, सादगी और दृढ़ता का आदर्श उदाहरण है। भारतीय लोगों द्वारा हर साल ढ़ेर सारी तैयारियों के साथ गाँधी जयंती मनायी जाती है। इस उत्सव को मनाने का उद्देश्य बापू को श्रद्धाजलि देने के साथ ही ब्रिटिश शासन से आजादी पाने में बापू द्वारा किये गये संघर्ष के बारे में भावी पीढ़ी को बताना है। ये हमें अपनी मातृभूमि के लिये हर समय खुली आँखों से सचेत रहने के लिये सिखाता है। मैं आप सबसे महात्मा गाँधी द्वारा कहा गया एक महान कथन बाँटना चाहूँगा।
  • “मेरा जीवन मेरा संदेश है, और दुनिया में जो बदलाव तुम देखना चाहते हो वह तुम्हें खुद में लाना पड़ेगा”।

गाँधी जयंती पर छोटा सा भाषण  हैं |

  • माननीय, आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षक महोदय और मेरे प्यारे साथियों को मैं प्यार भरा नमस्कार कहना चाहूँगी। मेरा नाम माया कुमारी सैनी  है, मैं कक्षा 12 में पढ़ती  हूँ। गाँधी जयंती के इस महान अवसर पर मैं भाषण दे रही हू। सबसे पहले मैं अपने टीचरस को धन्यवाद देना चाहूँगी  जिन्होंने इस राष्ट्रीय अवसर पर मुझे ये मौका प्रदान किया। मेरे प्यारे दोस्तों, हमलोग यहाँ गाँधी जयंती मनाने के लिये जुटे है (2 अक्टूबर अर्थात् महात्मा गाँधी का जन्म दिन)। ये एक शुभ अवसर है जो हमें देश के एक महान देशभक्त नेता को श्रद्धांजलि देने का मौका उपलब्ध कराता है। ये पूरे विश्व भर में राष्ट्रीय (गाँधी जयंती के रुप में) और अंतरराष्ट्रीय स्तर (अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस) पर मनाया जाता है।
  • आज, गाँधी जयंती के अवसर पर, मैं राष्ट्रपिता के जीवन इतिहास पर ध्यान दिलाना चाहूँगी , महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके अभिवावक का नाम करमचन्द गाँधी और पुतलीबाई था। प्राथमिक और 12वीं पास करने के बाद कानून की डिग्री लेने के लिये बापू 1888 में इंग्लैंड चले गये। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1915 में वह भारत लौटे और भारत की आजादी के आंदोलन में भाग लेना शुरु किया। जब एक बार वह दक्षिण अफ्रीका में नस्लवाद के पीड़ित बने जो उनकी आत्मा को बुरी तरह प्रभावित किया तब से नस्लवाद की सामाजिक बुराई का वह विरोध करना शुरु कर दिये।
  • भारत लौटने के बाद वो गोपाल कृष्ण गोखले से मिले और अंग्रेजी शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिये भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के आंदोलन से जुड़ गये। भारत की आजादी की प्राप्ति के लिये उन्होंने विभिन्न आंदोलनों की शुरुआत की जैसे 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन। वो एक महान देशभक्त नेता थे जिनके लगातार प्रयास की वजह से 1947 में अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। हम उनको श्रद्धांजलि देने के लिये उनका जन्म दिन मनाते है और हमें आजाद भारत देने के लिये धन्यवाद देते है।

2 अक्टुबर महात्मा गांधी जयंती पर विशेष भाषण
  • मैं देख रहा हूं । भीड़ इतनी बढ़ गयी हैं | जिससे इस बात का अनुमान हो सकता हैं कि भारत की आबादी सचमुच एकसों  पचास करोड़ है। , इतना जानते हुए भी मैं अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर सकता था कि इतने लोग किसी सभा में एकत्र हो सकते हैं। लोग कहते हैं कि भारत में स्त्रियाँ पर्दे में रहती हैं, मैंने भी देखा है। किन्तु इतना कहना पड़ेगा कि गांधी महात्मा से वह पर्दा नहीं करतीं।

  • मैंने गांधी का चित्र कई बार देखा है। समाचारपत्रों के अतिरिक्त कैलेण्डर पर, दियासलाई की डिबिया पर, ताश के पत्ते पर भी उनका चित्र देखा है किन्तु प्रत्यक्ष देखने का अवसर आज ही मिला। उनकी नाक और कान बड़े-बड़े हैं। सिर के बाल बहुत छोटे-छोटे छँटे हैं। जान पड़ता है तेल का खर्च बचाना चाहते हैं। इन्होंने मूँछें भी रख छोड़ी हैं। सम्भवतः समय की गति के साथ नहीं चल सके हैं। स्पष्ट है कि इन पर अंग्रेजी शिक्षा बेकार गयी है और इनका इंग्लैंड जाना निरर्थक हुआ है। यह कपड़ा भी साधारण पहनते हैं। सिला हुआ कोई कपड़ा इनके शरीर पर दिखायी नहीं पड़ा। एक छोटी-सी धोती और ऊपर का शरीर लपेटने के लिये एक छोटा-सा कपड़ा। लोगों का कहना है कि यह अपने हाथ के काते हुए सूत का कपड़ा पहनते हैं। इसीलिये कम पहनते हैं, क्योंकि अधिक सूत नहीं कात सकते होंगे।

  • इन्होंने भाषण आरम्भ किया। लाउड स्पीकरों के कारण भाषण दूर-दूर तक सुनायी देता था। पहली बात तो यह है कि यह बैठकर बोलते हैं। न तो हाथ इधर-उधर घुमाते हैं, न पैर पटकते हैं। बड़े-बड़े वक्ताओं की भाँति न गर्दन इधर से उधर जाती है, न जोश के साथ इधर से उधर घूमते हैं। फिर भी इतने लोग इनकी बातें सुनने आते हैं, आश्चर्य है।

  • इन्होंने पहली बात यह बतायी कि अगर स्वराज लेना हो तो सबको खादी पहननी चाहिये और सूत कातना चाहिये। मैंने तो समझा था कि यह सबको सलाह देंगे कि बम बनाओ, गोली-बारूद एकत्र करो। जापानियों की भाँति सब लोग सूट पहनो। पश्चिम के देशवाले स्वाधीन हैं, क्योंकि सब सूट पहनते हैं, किन्तु यह तो खादी को स्वराज के लिये आवश्यक समझते हैं। जब संसार में बड़ी-बड़ी मिलें चल रही हैं, तब यह कहते हैं, चर्खा चलाओ। इन्हें तो हजरत ईसा मसीह के युग में पैदा होना चाहिये था। बीसवीं शती के लिये तो यह अनुपयुक्त चीज हैं। हो सकता है इनका अभिप्राय यह हो कि खादी का प्रयोग सब लोग करने लगेंगे तब मैनचेस्टर की सब मिलें बन्द हो जायेंगी और इंगलैण्ड के बहुत-से काम करनेवाले बेकार हो जायेंगे और तब भूख से तड़फड़ा कर भारतवासियों से कह देंगे कि लो स्वराज, हम भूखों मर रहे हैं इसलिये तुम्हें स्वतन्त्र कर देते हैं। सम्भवतः यह स्थिति युद्ध से भी भयंकर हो सकती है।

  • यदि सचमुच सब लोगों ने खादी अपनायी तो इंग्लैंड के लिये बड़े संकट की अवस्था उपस्थित हो सकती है। किन्तु हमें आशा है कि महात्मा गांधी की इस बात को सब लोग नहीं मानेंगे। अंग्रेजी शिक्षा ने बहुत को यह बात सिखा दी होगी कि वह समझेंगे कि यह युग मशीनों का है और महात्मा गांधी सभ्यता की गाड़ी को हजारों वर्ष पीछे खींचे जा रहे हैं। यदि हम लोगों का दो सौ साल का प्रचार कुछ नहीं कर सका और महात्मा गांधी का दस-पन्द्रह साल का प्रचार इतना प्रभावशाली हो गया तब इतने दिनों का शासन हम लोगों का बेकार हुआ।

  • एक और बात महात्मा गांधी ने अपने भाषण में बतायी। कहा – ‘सब लोग मन से, वचन और कार्य से अहिंसात्मक हों। हिन्दू-मुसलमानों में मेल हो जाये और शराब पीना छोड़ दें तो स्वराज तुरन्त मिल जाये।’ भाषण के पश्चात् इतने जोरों से बस लोग ‘महात्मा गांधी की जय’ चिल्लाने लगे कि साधारण नींव के घर सब हिल गये होंगे। सभा से सब लोगों के निकलने में आध घंटे से कम नहीं लगा होगा।

  • दूसरे दिन सन्ध्या के समय कर्नल साहब से मैंने सभा का सारा हाल सुनाया। वह बहुत प्रसन्न हुए, बोले – ‘जो बातें उन्होंने कहीं उनसे भारत कभी स्वतन्त्र नहीं हो सकता।’ मैंने कहा कि सब लोग खद्दर पहनने लगेंगे तो इंग्लैंड के व्यापार को गहरी हानि पहुँच सकती है। कर्नल साहब – ‘यह सम्भव हो सकता है, किन्तु हम लोग महात्मा गांधी से भी चालाक हैं। हम लोग जो स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाते हैं उसके भीतर रहस्य है। तुम देखोगे कि बहुत-से भारतवासी ही इसका विरोध करेंगे। कहेंगे कि यह तो देश को सैकड़ों वर्ष पीछे ढकेलता है। जब सारा संसार आगे बढ़ रहा है हम लोग पीछे नहीं जा सकते। यह मशीन का युग है। रेल छोड़कर बैलगाड़ी पर नहीं चला जा सकता। वह लोग यह कहेंगे – इसी देश में मिल खुलें। देश का औद्योगीकरण होना चाहिये। तब देखना कितने लोग खद्दर पहनते हैं। इससे हमें भय नहीं है। भय एक ही है -हिन्दू-मुसलमान यदि मिल जायें।’

  • मैंने कहा – ‘इधर दो-तीन वर्षों में जो कुछ देखा और सुना है उससे तो यही जान पड़ता है कि यह लोग एक-दूसरे को सन्देह की दृष्टि से देखते हैं।’ कर्नल साहब बोले – ‘यही हमारे शासन की सफलता है। हमने यहाँ पर रेल चलायी, तार चलाया, डाकखाने बनवाये, बड़े-बड़े कॉलेज और स्कूल खोले। यह सब साधारण बातें हैं। इससे हमारा कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। किन्तु हिन्दू-मुसलमान लड़ते हैं और हमने ऐसा पढ़ाया है, ऐसी व्यवस्था की है कि यह लड़ते रहें। भाषण और लेख में सदा इस पर दुःख प्रकट करना चाहिये, किन्तु तरकीबें सोच-सोचकर करनी चाहिये कि दोनों एक-दूसरे का अविश्वास करते रहें। इतिहास की पुस्तकों में ऐसी बातें लिखनी चाहिये जिससे पता चले कि यह लोग सदा से एक-दूसरे की गरदन पर सवार रहे हैं। मैं तो तुम्हें भी सलाह दूँगा कि तुम एक ऐसी पुस्तक लिखो। हम लोग जो पुस्तक लिखते हैं वह समझी जाती है कि बड़ी खोज से लिखी गयी है। बात कुछ भी हो, उसे अपने एंगल से व्यक्त करना चाहिये। इसी को विद्वत्ता कहते हैं। यह कोई नहीं पूछने जायेगा कि बात ठीक है या गलत। सब लोग यही कहेंगे कि अमुक अंग्रेज की यह पुस्तक लिखी है और वह कॉलेजों में, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जायेगी।’

  • मैंने कहा कि मैं झूठ तो नहीं लिख सकता। उन्होंने कहा कि तुम्हें अनुभव नहीं है। झूठ और साम्राज्यवाद का ऐसा सम्बन्ध है जैसे टोस्ट और मक्खन का। झूठ बोलने में वीरता है। क्या तुम समझते हो क्लाइव, हेस्टिंग्स बेवकूफ थे? लायड जार्ज पागल थे? अगर हम लोग झूठ न बोलते तो भारत से कभी हाथ धो बैठते। संसार के राष्ट्रों में हमारी क्या स्थिति होती?

  • मैं ग्यारह बजे के लगभग अपने बँगले में आया। महात्मा गांधी के व्यक्तित्व की ओर सोचने लगा और कर्नल साहब की बातों की ओर सोचने लगा। महात्मा गांधी की बातों में कितनी सच्चाई है, कितनी निष्कपटता है। किन्तु साम्राज्य की रक्षा के लिये सत्य का भी बलिदान करना ही होगा। साम्राज्य की रक्षा का अर्थ तो अंग्रेज जाति की रक्षा है। अपनी रक्षा है।

  • पुस्तक लिखने के सम्बन्ध में तो बड़ा अच्छा सुझाव कर्नल साहब ने दिया है। क्यों न मैं एक ऐसी पुस्तक लिखूँ – जिसमें यह बात दिखायी जाये कि भारतीय स्वाधीनता के लिये सर्वथा अयोग्य हैं। केवल यही नहीं कि यहाँ हिन्दू-मुसलमानों में मेल नहीं है। हम बहुत-सी ऐसी बातें बता सकते हैं जिससे जान पड़ेगा कि भारतवासियों का स्वाधीन हो जाना एक जाति को, जिसे हमने थोड़ा सभ्य बनाया है, फिर असभ्यता के युग में लौटाना है। संसार के सम्मुख हमें ऐसी ही बातें रखनी चाहिये।

  • जैसे हिन्दू लोग मुर्दा जलाते हैं, धोती पहनते हैं, काँटे और छुरी की सहायता के बिना खाते हैं, यह बड़ी गंदी आदतें हैं। इन्हें कैसे स्वराज्य मिल सकता है? बहुत-से हिन्दू सिर के पीछे बालों का बड़ा-सा गुच्छा लटकाते हैं, साबुन लगाये बिना स्नान करते हैं, गोबर से घर लीपते हैं इन्हें स्वराज देकर संसार को गंदा बनाना है। जहाँ स्त्रियाँ लिपस्टिक नहीं लगातीं, नाचतीं नहीं, टेनिस नहीं खेलतीं, वह देश कभी स्वराज्य के योग्य हो सकता है? मुसलमानों के सम्बन्ध में हमें कहना चाहिये कि जो जाति घुटने के नीचे तक की अचकन पहनती है, एक-एक फुट की दाढ़ी रखती है, दिन में पाँच बार ईश्वर-वंदना के नाम पर समय की बरबादी करती है, वह स्वराज्य ले सकती है?

 

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