अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2017

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस:- दोस्तों इस साल भी पिछले साल की जेसे ही अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2017, शुक्रवार 8 सितंबर को मनाया जायेगा।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास के बारे में जाने

दोस्तों यूनेस्क नामक देश ने 7 नवंबर 1965 में एक येसा  फैसला किया कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर वर्ष 8 सितंबर को मनाया जोकि पहली बार 1966 से मनाना शुरु हुआ था | हमारे समाज, व्यक्ति और समुदाय के लिये साक्षरता के बड़े महत्व को ध्यान दिलाने के लिये पूरे विश्व भर में इसे मनाना शुरु किया गया। समुदाय में  बच्चे व बड़ो को शिक्षा और साक्षरता की दर को दुबारा से एक बार ध्यान दिलाने के लिये इस दिन को खासतौर पुरे विश्वव में ही मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का २०१७ में समारोह

हमारे देश में शिक्षा पर वैश्विक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार ये ध्यान देने योग्य बात है कि हर पाँच में से एक पुरुष और दो-तिहाई महिलाएँ अनपढ़ है। उनमें से कुछ के पास कम साक्षरता कौशल है, कुछ बच्चों की पहुँच आज भी स्कूलों से बाहर है और कुछ बच्चे स्कूलों में अनियमित रहते हैं। लगभग 58.6% की सबसे कम वयस्क साक्षरता दर दक्षिण और पश्चिम एशिया के नाम है। बुरकिना फासो, माली और नाइजर वो देश है जहाँ सबसे कम साक्षरता दर है।

यह पूरे विश्व में शिक्षा की खास विषय-वस्तु, कार्यक्रम और लक्ष्य से साथ मनाया जाता है। वर्ष 2007 और 2008 में इस दिन की विषय-वस्तु साक्षरता और स्वास्थ्य था (टीबी, कॉलेरा, एचआईवी और मलेरिया जैसी फैलने वाली बीमारी से लोगों को बचाने के लिये महामारी के ऊपर मजबूत ध्यान देने के लिये)। वर्ष 2009 और 2010 का मुद्दा साक्षरता और महिला सशक्तिकरण था जबकि 2011 और 2012 के इस उत्सव का विषय साक्षरता और शांति था।

समाज की साक्षरता दर को बढ़ावा देने के लिये असाधारण मूल्य के लिखित शब्द और जरुरत के बारे सार्वजनिक चेतना को बढ़ावा देने के लिये इस दिन को मनाने का खास महत्व है। साक्षरता सुधार की मदद करने के लिये कुछ लेखकों ने लेख लिखे हैं वो हैं- मारगरेट एटवुड, पॉलो कोहेलहो, फिलीप डेलर्म, पॉल ऑस्टर, फिलीप क्लॉडेल, फैटेउ डियोम आदि और भी बहुत सारे। कुछ कंपनियाँ, दानी संस्थाएँ, वैश्विक विकास शोध केन्द्र, रोटरी अंतर्राष्ट्रीय, मौंटब्लैंक और राष्ट्रीय साक्षरता संस्थान भी सामाजिक साक्षरत को बढ़ावा देने में शामिल हैं। साक्षरता इंसान के जीवन को आकार देने के साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी बनाता है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है :-

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस को मनाने का उद्देश्य साक्षरता की दिशा में लोगों का ध्यान खींचना और सामाजिक और मानव विकास के लिए उसके अधिकारों का ज्ञान देना है | सफलता के साक्षरता उतना ही महत्वपूर्ण है जितना जीवित रहने के लिए खाद्य पदार्थ है | यह गरीबी उन्मूलन (poverty), बाल मृत्यु (child mortality) दर को कम करने, जनसंख्या वृद्धि (population growth) को नियंत्रित करने, लैंगिक समानता ( gender equality) की प्राप्ति आदि के लिए भी आवश्यक है | साक्षरता में व्यक्ति को अपनी पारिवारिक स्थिति और देश को अपना दर्जा बढ़ाने की क्षमता है | यह दिन सतत शिक्षा प्राप्त करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने और परिवार , समाज और देश के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए मनाया जाता है |

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की विषय-वस्तु :-

दुनिया भर के कई देशों में निरक्षरता से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए कुछ रणनीतिक योजना को क्रियान्वित करने के लिए और अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस को प्रभावी बनाने के लिए इसके उत्सव के साथ उस वर्ष का एक विशेष विषय जुड़ा होता है | अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के वर्षवार विषयों में से कुछ नीचे दिए गए हैं :-

  1. वर्ष 2006 का विषय था “Literacy sustains development” | सामाजिक प्रगति को प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया गया |
  2. वर्ष 2007 -2008 के लिए विषय था  “Literacy and Health” | साक्षरता और महामारियों (HIV, TV, Malaria, आदि संक्रामक रोगों ) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए |
  3. वर्ष 2009 -2010 के लिए विषय था  “Literacy and Empowerment” | लैंगिक समानता और महिलाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए |
  4. वर्ष 2011 -2012 के लिए विषय था  “Literacy and Peace” | शांति के लिए साक्षरता के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने के लिए |
  5. वर्ष 2013 के लिए विषय था  “Literacies for the 21st Century” | वैश्विक साक्षरता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए |
  6. वर्ष 2014 के लिए विषय था  “Literacy and Sustainable Development” | सामाजिक विकास, आर्थिक विकास, पर्यावरण एकीकरण के क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए  |
  7. वर्ष 2015 के लिए विषय था  “Literacy and Sustainable Societies”

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