December 3, 2016
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हिन्दी दिवस पर स्लोगन और नारे Hindi Diwas Slogans Nibndh

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हिन्दी दिवस पर स्लोगन और नारे Hindi Diwas Slogans Nibndh

हिंदी दिवस का इतिहास Hindi Divas Itihas History

  • हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • वर्ष 1918 में महात्मा गांधी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।

वर्ष 1949 में

  • स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया संघ की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा। हिन्दी दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष ’14 सितम्बर’ को मनाया जाता है। हिन्दी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और अपने आप में एक समर्थ भाषा है।
  • प्रकृति से यह उदार ग्रहणशील, सहिष्णु और भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका है। इस दिन विभिन्न शासकीय, अशासकीय कार्यालयों, शिक्षा संस्थाओं आदि में विविध गोष्ठियों, सम्मेलनों, प्रतियोगिताओं तथा अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कहीं-कहीं ‘हिन्दी पखवाडा’ तथा ‘राष्ट्रभाषा सप्ताह’ इत्यादि भी मनाये जाते हैं। विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा भी है, अतः इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करने के लिए ऐसे आयोजन स्वाभाविक ही हैं, परन्तु, दुःख का विषय यह है कि समय के साथ-साथ ये आयोजन केवल औपचारिकता मात्र बनते जा रहे हैं।
  • चौदह सितंबर समय आ गया है एक और हिंदी दिवस मनाने का आज हिंदी के नाम पर कई सारे पाखंड होंगे जैसे कि कई सारे सरकारी आयोजन हिंदी में काम को बढ़ावा देने वाली घोषणाएँ विभिन्न तरह के सम्मेलन इत्यादि इत्यादि। हिंदी की दुर्दशा पर घड़ियाली आँसू बहाए जाएँगे, हिंदी में काम करने की झूठी शपथें ली जाएँगी और पता नहीं क्या-क्या होगा। अगले दिन लोग सब कुछ भूल कर लोग अपने-अपने काम में लग जाएँगे और हिंदी वहीं की वहीं सिसकती झुठलाई व ठुकराई हुई रह जाएगी।
  • ये सिलसिला आज़ादी के बाद से निरंतर चलता चला आ रहा है और भविष्य में भी चलने की पूरी पूरी संभावना है। कुछ हमारे जैसे लोग हिंदी की दुर्दशा पर हमेशा रोते रहते हैं और लोगों से, दोस्तों से मन ही मन गाली खाते हैं क्यों कि हम पढ़े-लिखे व सम्मानित क्षेत्रों में कार्यरत होने के बावजूद भी हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग के हिमायती हैं। वास्तव में हिंदी तो केवल उन लोगों की कार्य भाषा है जिनको या तो अंग्रेज़ी आती नहीं है या फिर कुछ पढ़े-लिखे लोग जिनको हिंदी से कुछ ज़्यादा ही मोह है और ऐसे लोगों को सिरफिरे पिछड़े या बेवक़ूफ़ की संज्ञा से सम्मानित कर दिया जाता है।

हिन्दी दिवस पर कविता

हिन्दी-हिन्दु-हिन्दुस्तान,

कहते है, सब सीना तान,

पल भर के लिये जरा सोचे इन्सान

रख पाते है हम इसका कितना ध्यान,

सिर्फ 14 सितम्बर को ही करते है

अपनी राष्टृ भाषा का सम्मान

हर पल हर दिन करते है हम

हिन्दी बोलने वालो का अपमान

14 सितम्बर को ही क्यों

याद आता है बस हिन्दी बचाओं अभियान

क्यों भूल जाते है हम

हिन्दी को अपमानित करते है खुद हिन्दुस्तानी इंसान

क्यों बस 14 सितम्बर को ही हिन्दी में

भाषण देते है हमारे नेता महान

क्यों बाद में समझते है अपना

हिन्दी बोलने में अपमान

क्यों समझते है सब अंग्रेजी बोलने में खुद को महान

भूल गये हम क्यों इसी अंग्रेजी ने

बनाया था हमें वर्षों पहले गुलाम

आज उन्हीं की भाषा को क्यों करते है

हम शत् शत् प्रणाम

अरे ओ खोये हुये भारतीय इंसान

अब तो जगाओ अपना सोया हुआ स्वाभिमान

उठे खडे हो करें मिलकर प्रयास हम

दिलाये अपनी मातृभाषा को हम

अन्तरार्ष्टृीय पहचान

ताकि कहे फिर से हम

हिन्दी-हिन्दु-हिन्दुस्तान,

कहते है, सब सीना तान,

जब भी आंखें खोलतीं हूं, नन्हे-नन्हे सपने बुनती हूं,
उन्हें साकार करने के लिए, छोटे छोटे कदम बढ़ाती हूं,

कभी आकाश बनकर ,तो कभी धरती बनकर समाज को सींचती हूं
हूं शक्ति का एक रूप फिर भी, अबला कहलाती हूं
ज़िन्दगी के हर रंग में हूं मैं मौजूद,
फिर भी कहने को हूं मज़बूर …… हम भी तो हैं.

हिन्दी दिवस स्लोगन Hindi Diwas Slogans हिंदी दिवस पर नारे

हिन्दी है भारत के एकता और अखंडता की पहचान
हिन्दी हीं तो है मेरे भारत की जान.

जब भारत करेगा हिन्दी का सम्मान
तभी तो आगे बढ़ेगा हिन्दुस्तान.

हिन्दी है भारत की आशा
हिन्दी है भारत की भाषा.

हर भारतीय की शक्ति है हिन्दी
एक सहज अभिव्यक्ति है हिन्दी.

जब तक हिन्दी नहीं बनेगी, गरीबों की शक्ति
तब तक देश को नहीं मिलेगी, गरीबी से मुक्ति.
हिन्दी ने देश को जोड़े रखा है
हमारे मतभेदों को तोड़े रखा है.
हिन्दी का पतन भारत का पतन है.
हर दिन नया विहान है हिन्दी
मेरे हिन्द की प्राण है हिन्दी.
निज भाषा का जो नहीं करते सम्मान
वे कहीं नहीं पाते हैं सम्मान.
हिन्दी के बिना न तो आजादी पाई जा सकती थी
और न तो हिन्दी के बिना आजादी बरकरार रह सकती है.
भारत के गाँवों और कस्बों की भाषा है हिन्दी
शहरों और गाँवों की ताकत है हिन्दी.
हिन्दुस्तान के लिए हिन्दी से अच्छी कोई भाषा नहीं हो सकती है.
हिन्दी हीं वह भाषा है, जिसने भारत की आजादी के लौ को कभी कम नहीं होने दिया.
अंग्रेजी भारत के लिए उपयोगी है, लेकिन हिन्दी भारत के लिए जरूरी है.
हिन्दी का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि चाहे किसी नेता, अभिनेता या व्यापारी को हर भारतीय तक अपनी बात पहुंचानी होती है, तो उसे हिन्दी का उपयोग करना हीं पड़ता है.
हिन्दी के बिना भारत गूंगा हो जाएगा.
हिन्दी हम अपनाएंगे. राष्ट्र की शान बढ़ाएंगे.
हिन्दी एक जानदार और शानदार भाषा है.
हिन्दी हीं एक मात्र भाषा है, जिसने भारत को एक सूत्र में पिरोये रखा है.
हिन्दी चिरकाल से हीं एक ऐसी भाषा रही है, जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी भी शब्द का बहिष्कार नहीं किया है.
हिन्दी से आसान दूसरी कोई भाषा नहीं है.
मातृभाषा के बिना स्वतन्त्रता बरकरार नहीं रह सकती है.

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