December 7, 2016
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मथुरा में आज रात्रि 11.55 बजे जन्म लेंगे यशोदा के नंदलाल

मथुरा में आज जन्मेंगे कन्हैया, घर-घर लेंगे बलैया ,हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की

मथुरा में आज रात्रि 11.55 बजे जन्म लेंगे यशोदा के नंदलाल

आज बालकृष्ण के जन्म की खुशियां छाने लगी हैं। रोहिणी नक्षत्र में गुरुवार की रात्रि में कन्हैया एक बार फिर रक्षकों की घेरेबंदी के बीच जन्म लीला दिखाएंगे। भक्त भी पीछे नहीं हैं, उन्होंने अपने देवालयों संग घरों में भरपूर तैयारियां कर ली हैं।

मंदिरों और घरों में बेसब्री से बालकृष्ण की बलैया लेने का इंतजार हो रहा है। देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं ने भी प्रभु आंगन में डेरा डाल दिया है। बाहर से आने वाले भक्तों के सत्कार के लिए सेवाभावी भी पलक-पांवड़े बिछाने को तत्पर हैं। सेवा का शंखनाद करने वाला वर्ग जन्मभूमि, राजाधिराज द्वारिकाधीश के सभी रास्तों पर भक्तों की आवभगत करेंगे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बुधवार को केशवदेव की पोशाक सायं वेला में शोभायात्रा के रूप में गाजे-बाजे के बीच अर्पित की गई। पोशाक, कमल पुष्प, अभिषेक पात्र, रत्न आभूषण आदि के दर्शन को खूब भीड़ लगी।

अभिषेक कार्यक्रम

जन्ममहाभिषेक रात्रि 11 बजे से श्रीगणेश-नवग्रह पूजन से होगा। रात्रि 11.55 पर 1008 कमल पुष्पों से सहस्रार्चन होगा। प्राकट्य के दर्शन 12 बजे होंगे और आंगन जय-जयकार संग गायन-वादन से गूंज उठेगा। 12.10 बजे कमल पुष्प पर विराजमान प्रभु का चल विग्रह मुग्ध करेगा। 12.40 पर शृंगार आरती होगी। दर्शन रात्रि 1.30 बजे तक होंगे। 11000 किलोग्राम प्रसाद तैयार हो रहा है और यह 8 बजे से रात्रि 2 बजे तक बंटेगा।

इस बार रात्रि दो बजे तक खुलेंगे जन्मस्थान के पट
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा इस बार जन्माष्टमी पर भागवत भवन के पट आधा घंटे अधिक खोले जाएंगे। प्रतिवर्ष रात्रि 1.30 बजे तक ठाकुरजी के दर्शन होते थे, लेकिन उस दरम्यान जन्मोत्सव की व्यवस्था में लगे हजारों अधिकारी, सुरक्षाकर्मी, मंदिर कर्मचारी आदि सेवक दर्शन नहीं पाते थे। ऐसे में उनको वंचित रहना पड़ता था।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी  पूजन :

25 अगस्त को प्रात: 6 से 6.15 तक मंगला आरती, प्रात: 6 बजे से प्रात: 9 बजे पंचामृत स्नान के दर्शन, 7.30 उत्थापन, जागरण दर्शन रात्रि 10 बजे, जन्म के दर्शन रात्रि 11. 45 बजे होंगे। 26 अगस्त को नंदमहोत्सव प्रात: 10 बजे शुरू होगा। इसमें मंगला, शृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थापन, भोग, आरती के तथा शयन के दर्शन सायं 4. 30 बजे से सायं 5 बजे तक होंगे। इसके साथ भगवान आम दिनों के शयन समय से ढाई घंटे पहले ही सोने के लिए निज महल में चले जाएंगे।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी किसे कहते हैं ?

इसी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।
हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की’ उद्घोषों के बीच यह पर्व पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जायगा।

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