December 4, 2016
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जानिए धनतेरस के महापर्व को – राशि के अनुसार करे खरीददारी , क्यो करते हैं धनतेरस पर बर्तनों की हि खरीददारी जानिए

आज धनतेरस का पवित्र महापर्व है | जिसे ब्रह्माण्ड के पहले चिकित्सक “धन्वन्तरी” की याद में मनाया जाता है क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे अमूल्य धन है |

जानिए धनतेरस के महापर्व को

आज के ही दिन मतलब आश्विन महीने के 13 वें दिन समुद्र मंथन के दौरान ब्रह्माण्ड के प्रथम चिकिसक भगवान् धन्वन्तरी हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और ऐसी मान्यता है कि आज के दिन धातु घर लाने से उसके साथ अमृत के अंश भी घर आते हैं और, अमृत अच्छे स्वास्थ्य की गारंटी होती है इसीलिए, आज धनतेरस के दिन दवाई ना खा कर धातु ख़रीदा जाता है क्योंकि, दवाई से तो बीमारी का तात्कालिक समाधान होगा जबकि अमृत घर लाने से बीमारी ही नहीं आएगी |

 किसी भी व्यक्तियों को समुद्र मंथन की घटना काल्पनिक लगती हो वे बिहार राज्य के भागलपुर में स्थित “मंदारहिल” पर्वत को जा कर देख सकते हैं जो आज भी मौजूद है और उस पर समुद्र मंथन के दौरान हुए रस्सी के (शेषनाग) रगड़ के निशान अभी तक मौजूद हैं |

  • धनतेरस के बारे में एक बहुत ही प्रचलित कथा है कि…

राजा हिमा का एक 16 साल का पुत्र था जो कि कुंडली के अनुसार अल्पायु था और, कुंडली के अनुसार शादी के चौथे दिन उसकी मृत्यु सर्पदंश से होनी थी | परन्तु शादी के चौथे दिन उसकी युवा और चतुर पत्नी ने राजकुमार को कहानियां एवं गीत सुना कर उसे रात भर सोने नहीं दिया और, राजकुमार के चारो तरफ दीप प्रज्ज्वलित कर दिया साथ ही शयनकक्ष के बाहर सोने-चाँदी के सिक्कों की ढेर लगा कर रख दी | विधि के विधान के अनुसार समय पर नागिन के रूप में यमदूत आए परन्तु, सोने-चाँदी के सिक्कों की चमक के कारण नागिन की आँखें चौंधिया गयी और वो आगे नहीं बढ़ पायी और वहीँ बैठ गयी और अगली सुबह वापस लौट गयी | इस तरह राजकुमार की युवा पत्नी ने अपने चातुर्य एवं कौशल से उस मनहूस घडी को टाल दिया और अपने पति को बचा लिया | इसीलिए आज की रात को “यमदीपदान” के रूप में भी मनाया जाता है और, रात भर दीप जला कर बाहर जल रखा जाता है |

धनतेरस 28 अक्टूबर, 2016 शुभ मुहूर्त : धन तेरस, शुक्रवार, कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष 28 अक्टूबर , 2016 / Dhanteras 28 October, 2016 Auspicious Time dhanteras :

उत्तरी भारत में कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास से मनाया जाता है. देव धनवन्तरी के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है. इस दिन कुबेर के अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है. इस दिन यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है. धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए. इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है.

धनतेरस का महत्व / Significance of Dhanteras

साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है. शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है. इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्ध के रुप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है. साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है.

धन त्रयोदशी के दिन देव धनवंतरी देव का जन्म हुआ था. धनवंतरी देव, देवताओं के चिकित्सकों के देव है. यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बडी-बडी योजनाएं प्रारम्भ की जाती है. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ रहता है.

धन तेरस पूजा मुहूर्त / Auspicious Time for Dhanteras Puja

1. प्रदोष काल :-
सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है. प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है.

दिल्ली में 28 अक्टूबर सूर्यास्त समय सायं 17:35 तक रहेगा. इस समय अवधि में स्थिर लग्न 18:35 से लेकर 20:30 के मध्य वृषभ काल रहेगा. मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.

2. चौघाडिया मुहूर्त:-
-28 अक्टूबर 2016, शुक्रवार ,
-अमृ्त काल मुहूर्त 09:00 से 10:30 तक ,
-चर काल 16:30 से लेकर 18:00 तक ,
-लाभ काल 21:00 से 22:30 तक,

उपरोक्त में लाभ समय में पूजन करना लाभों में वृ्द्धि करता है. शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन, स्वास्थय व आयु में शुभता आती है. सबसे अधिक शुभ अमृ्त काल में पूजा करने का होता है.

सांय काल में शुभ महूर्त / Auspicious Time During the Evening

17:35 से 18:20 तक का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा.

 

धनतेरस में क्या खरीदें / What to Buy During Dhanteras

लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.

इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है. इस दिन बर्तन, चांदी खरीदने से इनमें 13 गुणा वृ्द्धि होने की संभावना होती है. इसके साथ ही इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है. दीपावली के दिन इन बीजों को बाग/ खेतों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है.

धन तेरस पूजन / Dhanteras Puja

धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए. देव कुबेर का ध्यान करते हुए, भगवान कुबेर को फूल चढाएं और ध्यान करें, और कहें, कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरूडमणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा व वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृ्त शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का मैं ध्यान करता हूँ.

इसके बाद धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करें. और निम्न मंत्र का जाप करें.

‘यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।’

  • धनतेरस की कथा / Story of Dhanteras

एक कथा के अनुसार एक राज्य में एक राजा था, कई वर्षों तक प्रतिक्षा करने के बाद, उसके यहां पुत्र संतान कि प्राप्ति हुई. राजा के पुत्र के बारे में किसी ज्योतिषी ने यह कहा कि, बालक का विवाह जिस दिन भी होगा, उसके चार दिन बाद ही इसकी मृ्त्यु हो जायेगी.

ज्योतिषी की यह बात सुनकर राजा को बेहद दु:ख हुआ, ओर ऎसी घटना से बचने के लिये उसने राजकुमार को ऎसी जगह पर भेज दिया, जहां आस-पास कोई स्त्री न रहती हो, एक दिन वहां से एक राजकुमारी गुजरी, राजकुमार और राजकुमारी दोनों ने एक दूसरे को देखा, दोनों एक दूसरे को देख कर मोहित हो गये, और उन्होने आपस में विवाह कर लिया.

ज्योतिषी की भविष्यवाणी के अनुसार ठीक चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचें. यमदूत को देख कर राजकुमार की पत्नी विलाप करने लगी. यह देख यमदूत ने यमराज से विनती की और कहा की इसके प्राण बचाने का कोई उपाय बताईयें. इस पर यमराज ने कहा की जो प्राणी कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात में जो प्राणी मेरा पूजन करके दीप माला से दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाला दीपक जलायेगा, उसे कभी अकाल मृ्त्यु का भय नहीं रहेगा. तभी से इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाये जाते है.

  • धनतेरस पर कैसे करें पूजा ? 

धनतेरस पूजन में रखें इनका खास ध्यान

धनतेरस और यम दीपदान का महत्व : प्रचलित कथा के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरी‍ अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्होंने देवताओं को अमृतपान कराकर अमर कर दिया था।

अतः वर्तमान संदर्भ में भी आयु और स्वास्थ्य की कामना से धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी‍ का पूजन किया जाता है। इस दिन वैदिक देवता यमराज का पूजन भी किया जाता है।

  • नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें।
  • सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करें।
  • मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाए |
  • यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करते हैं।
  • हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें।
  • कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआं, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाएं।

 

  • धनतेरस पूजन में क्या करें

 कुबेर पूजन – 
शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएं अथवा पुरानी गादी को ही साफ कर पुनः स्थापित करें।
सायंकाल पश्चात तेरह दीपक प्रज्वलित कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करते हैं।

कुबेर का ध्यान – 

निम्न ध्यान मंत्र बोलकर भगवान कुबेर पर फूल चढ़ाएं –
ष्ठ विमान पर विराजमान, गरुड़मणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा एवं वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृत तुंदिल शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र निधीश्वर कुबेर का मैं ध्यान करता हु

इसके पश्चात निम्न मंत्र द्वारा चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें –

‘यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।’
इसके पश्चात कपूर से आरती उतारकर मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें।

 

  • इस बार धनतेरस पर होगी धनवर्षा, राशियों के अनुसार करें खरीदारी :

दीपों का त्योहार दीपोत्सव इस बार धन त्रयोदशी यानी धनरेतस से शुरू हो रहा है। विशेष योग के कारण यह काफी फलदायी साबित होगा। इस वर्ष रविवार शाम 4 बजकर 34 मिनट से शुभ मुहूर्त शुरू हो रहा है जो सोमवार 6.47 मिनट तक रहेगा। हालांकि खरीदारी देर रात तक की जा सकेगी। सोमवार का दिन त्रयोदशी तिथि के कारण काफी अहम है, क्योकि त्रयोदशी के स्वामी भगवान शिव शंकर है। शिव की कृपा से ही इस बार खास संयोग बन रहा है। धनतेरस पर सुबह से दिन भर श्रेष्ठ मुहूर्त है। 43 वर्ष बाद धनतेरस पर मंगल धनवर्षा का योग बन रहा है। इससे पूर्व 1969 मे ऐसा संयोग देखने को मिला था। धनतेरस सभी के लिए मंगलकारी रहेगा। इस बार भगवान कुबेर अपने खजाने का द्वार खोल देगे। बाजार मे कुबेर जी धनवर्षा करेगे।

इस बार सूर्यास्त व सूर्योदय दोनो धनतेरस मे होने कारण भी अधिक सुखद योग बन रहा है। इसलिए धनतेरस पर खरीदारी ज्यादा शुभ फल देगी।

धनवंतरि पूजा से मिलेगी रोगो से मुक्ति :

भगवान धनवंतरि आयुर्वेद के जनक है। मान्यता है कि धनतेरस पर उनकी पूजा करने से तमाम रोगो से मुक्ति मिलती है। इस दिन जड़ी-बूटियो के साथ तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व है। ऐसे लोगो पर भगवान धनवंतरि की कृपा बनी रहती है।

भगवान कुबेर की पूजा भी है फलदायी :

धनतेरस पर भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। इससे घर मे सुख-समृद्धि के साथ धन का आगमन बना रहता है। धनतेरस पर पहले लोग बर्तन की खरीदारी करते थे लेकिन अब इसका ट्रेड बदल चुका है। लोग सोने व चांदी की वस्तुओ की खरीदारी के साथ वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज्यादा खरीद रहे है।

धनरतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त :

-सोमवार सुबह 8.42 से दोपहर 3.49 तक
-सोमवार दोपहर 4.49 से 6.49 बजे तक श्रेष्ठ
-दोपहर तीन बजे से 4.30 बजे तक राहुकाल फिर भी शुभ फलदायी

  • धन तेरस पर राशियो के अनुसार करे खरीदारी :

– मेष राशि : सोना, चांदी, भूमि तथा लाल रंग का वाहन खरीदना शुभ होगा
– वृष राशि : चांदी का वर्तन खरीदना शुभ होगा
– मिथुन राशि : वाहन और सोने की खरीदारी शुभ
– कर्क राशि : चांदी व सफेद रंग का वाहन खरीदना शुभ
– सिंह राशि : सोना और पीले रंग का वाहन खरीदना शुभ रहेगा
– कन्या राशि : इस राशि के लोगो के लिए सोने की खरीदारी रहेगी शुभ
– तुला राशि : चांदी व कंप्यूटर की खरीदारी शुभ
– वृश्चिक राशि : सोना व लाल रंग का वाहन खरीदना रहेगा शुभ
– धनु राशि : सोना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणो की खरीदारी शुभ
– मकर राशि : इस राशि के लोगो के लिए वाहन की खरीदारी शुभ
– कुंभ राशि : इस राशि के लिए एल्यूमीनियम व वाहन शुभ
– मीन राशि : सोना, चांदी व पीतल की वस्तु की खरीदारी रहेगी शुभ

  • इसलिए खरीदे जाते हैं धनतेरस के दिन नए बर्तन : दीपावली से पहले मनाए जाने वाले धनतेरस के दिन नए बर्तन, आभूषणों और दूसरी वस्तुओं को खरीदने की परंपरा है। लेकिन शायद आपको ये पता नहीं होगा कि आखिर क्यों धनतेरस के दिन इन चीजों की खरीददारी की जाती है .

दीपावली से पहले मनाए जाने वाले धनतेरस के दिन नए बर्तन, आभूषणों और दूसरी वस्तुओं को खरीदने की परंपरा है। लेकिन शायद आपको ये पता नहीं होगा कि आखिर क्यों धनतेरस के दिन इन चीजों की खरीददारी की जाती है। आखिर क्यों इस दिन नए बर्तनों के अलावा दूसरी वस्तुओं को खरीदा जाता है।कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस आती है। इस दिन भगवान धनवंतरी भी सागर मंथन के उपरांत प्रकट हुए थे। उनके प्राकट्य के कारण इसे धनतेरस कहा जाता है। धनवंतरी आयुर्वेद के जनक हैं। वे सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान देते हैं।

सागर मंथन से ही देवी लक्ष्मी का आविर्भाव हुआ था। यह तिथि भगवान धनवंतरी के जन्म के दो दिन बाद आई थी। इसीलिए दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन की परंपरा शुरू हुई।

चूंकि भगवान धनवंतरी जीवन और स्वास्थ्य के रक्षक माने जाते हैं, इसलिए उनके हाथ में अमृत से भरा कलश है। इस कलश के कारण ही धनतेरस के दिन नए बर्तन खरीदे जाते हैं। मान्यता है कि ये उस परिवार के लिए शुभ होते हैं। इसी प्रकार धनतेरस के दिन चांदी के बर्तन, आभूषण और चांदी के सिक्के खरीदने का भी प्रचलन है। चांदी का संबंध ज्योतिष से है। यह चंद्रमा तथा मन से जुड़ी है। माना जाता है कि धनतेरस के दिन चांदी खरीदने या शुभ मुहूर्त में उसके आभूषण पहनने से चंद्रमा के दोष का निवारण होता है। चांदी घर में समृद्धि और सफलता लेकर आती है।

  • धनतेरस पर एक दीपक जलाना हि क्यों जरूरी हैं : आज धनतेरस है, खरीदारी में इतने व्यस्त न हो जाएं कि शाम के समय दीपदान करना भूल जाएं। शास्त्रों के अनुसार धनतेरस की शाम दीपदान का बड़ा ही महत्व है। माना जाता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु से बचाव होता है।

इस संदर्भ में कथा है कि, एक बार यमराज ने यमदूतों से कहा लोगों के प्राण हरते समय तुम्हें कभी दुःख हुआ है अथवा नहीं। इस पर यमदूत ने कहा कि एक बार एक राजकुमार के प्राण हरते समय हमें बहुत दुःख हुआ था। राजकुमार की शादी के चार ही दिन हुए थे। राजकुमार की मृत्यु से राजमहल में चित्कार और हाहाकार मच गया। नववधू का विलाप देखकर हमारा हृदय हमें धिक्कारने लगा। इसके बाद यमदूतों ने यमराज से पूछा कि हे यमदेव कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे प्राणी की अकाल मृत्यु न हो।

यमराज ने कहा कि ‘जो व्यक्ति धनतेरस के दिन मेरे नाम से दीप जलाकर मुझे स्मरण करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा।’

यमदीप की दूसरी कथा

यमदीप के संदर्भ में एक अन्य कथा भी प्रचलित है कि, प्राचीन काल में एक हिम नामक राजा हुए। विवाह के कई वर्षों बाद इन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। ज्योतिषियों ने जब राजकुमार की कुण्डली देखी तो कहा कि विवाह के चौथे दिन राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। राजा रानी इस बात को सुनकर दुःखी हो गये। समय बितता गया और राजकुमार की शादी हो गयी। विवाह का चौथा दिन भी आ गया।

राजकुमार की मृत्यु होने के भय से सभी लोग सहमे हुए थे। लेकिन राजकुमार की पत्नी चिंता मुक्त थी। उसे मां लक्ष्मी की भक्ति पर पूरा विश्वास था। शाम होने पर राजकुमार की पत्नी ने पूरे महल को दीपों से सजा दिया। इसके बाद मां लक्ष्मी के भजन गाने लगी। यमदूत जब राजकुमार के प्राण लेने आये तो मां लक्ष्मी की भक्ति में लीन राजकुमार की पतिव्रता पत्नी को देखकर महल में प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाये। यमदूतों के लौट जाने पर यमराज स्वयं सर्प का रूप धारण करके महल में प्रवेश कर गये।

सर्प बने यमराज जब राजकुमारी के कक्ष के समाने पहुंचे तब दीपों की रोशनी और लक्ष्मी मां की कृपा से सर्प की आंखें चौंधिया गयी और सर्प बने यमराज राजकुमारी के पास पहुंच गये। राजकुमारी के भजनों में यमराज ऐसे खोये की उन्हें पता ही नहीं चला कि कब सुबह हो गयी। राजकुमार की मृत्यु का समय गुजर जाने के बाद यमराज को खाली हाथ लौटना पड़ा और राजकुमार दीर्घायु हो गया। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन से धनतेरस के दिन यमदीप जलाने की परंपरा शुरू हुई।

ऐसे जलाएं दीपक

शाम के समय नए दीपक में सरसो का तेल भरकर यमराज का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं। दीपक को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रख दें।

  • कारोबारियों के लिए धनतेरस का खास महत्व : कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस की पूजा के साथ ही दीपावली के आयोजन शुरू हो जाते हैं। कारोबारियों के लिए धनतेरस का खास महत्व होता है क्योंकि धारणा है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक सी के मिश्र ने बताया ‘हिंदू कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इसके ठीक दो दिन बाद दीपावली मनाई जाती है। ‘धन’ का मतलब समृद्धि और ‘तेरस’ का मतलब तेरहवां दिन होता है।’ उन्होंने कहा कि धनतेरस के दिन से दीपावली आयोजनों की शुरूआत हो जाती है। घरों, कार्यालयों और कारोबारी प्रतिष्ठानों में सफाई की जाती है और उन्हें रोशनी, फूलों तथा रंगोली से सजाया जाता है। द्वार पर चावल के आटे से रंगोली सजाई जाती है और लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां की जाती हैं। लक्ष्मी के पैरों के संकेत के तौर पर रंगोली से घर के अंदर तक छोटे छोटे पैरों के चिह्न बनाए जाते हैं। शाम को 13 दिए जला कर लक्ष्मी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है।

चांदनी चौक में पिछले 30 साल से बर्तनों की दुकान चला रहे भगवानदास तीरथदास पंजवानी ने कहा ‘हम कारोबारियों के लिए यह दिन खास महत्व रखता है। इस दिन अक्सर लोग नया सामान खरीदते हैं और पूरे साल के कारोबार का लगभग 40 से 50 फीसदी व्यवसाय इस दिन हो जाता है। हमें इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन तो हमारी दुकान सुबह सात बजे ही खुल जाती है।’

पंजवानी ने कहा कि सौभाग्य सूचक के तौर पर इस दिन लोग सोना या चांदी या बर्तन खरीदते हैं। जमीन, कार खरीदने, निवेश करने और नए उद्योग की शुरूआत के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है। गांवों में इस दिन लोग पशुओं की पूजा करते हैं। वह मानते हैं कि उनकी आजीविका पशुओं से चलती है इसलिए आय के स्रोत के तौर पर उनकी पूजा करना चाहिए। दक्षिण भारत में इस दिन गायों को खूब सजाया जाता है और फिर उनकी पूजा की जाती है। गायों को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।दक्षिण के कुछ राज्यों में और महाराष्ट्र में इस दिन चावल के आटे से रंगोली बनाई जाती है और लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी की जाती है। उत्तर भारत में इस दिन नए बर्तनों या गहनों के साथ लक्ष्मी पूजा की जाती है। कई घरों में रात दीया जलाया जाता है

इसके साथ ही मेरे सभी मित्रो एवं उनके सम्पूर्ण परिवारजनों को अच्छे स्वास्थ्य एवं ढेर सारे धन प्राप्ति की कामना के साथ आज धनतेरस एवं आगामी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ |

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