December 9, 2016
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Deen Dayal Antyodaya Yojana दीनदयाल अंत्योदय योजना

Deen Dayal Antyodaya Yojana दीनदयाल अंत्योदय योजना

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दीनदयाल अंत्योदय योजना
दीनदयाल अंत्योदय योजना का उद्देश्य योजना का उद्देश्य कौशल विकास और अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका के अवसरों में वृद्धि कर शहरी और ग्रामीण गरीबी को कम करना है। मेक इन इंडिया, कार्यक्रम के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सामाजिक तथा आर्थिक बेहतरी के लिए कौशल विकास आवश्यक है। दीनदयाल अंत्योदय योजना को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय (एच.यू.पी.ए.) के तहत शुरू किया गया था। भारत सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

यह योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एन.यू.एल.एम.) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम.) का एकीकरण है।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एन.यू.एल.एम.) को दीन दयाल अंत्योदय योजना – (डी.ए.वाई.-एन.यू.एल.एम.) और हिन्दी में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन नाम दिया गया है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों के लिए दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना के अंतर्गत सभी 4041 शहरों और कस्बों को कवर कर पूरे शहरी आबादी को लगभग कवर किया जाएगा। वर्तमान में, सभी शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में केवल 790 कस्बों और शहरों को कवर किया गया है।

दीन दयाल अंत्योदय योजना तथा राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का लक्ष्य एन.यू.एल.एम.

इस योजना का लक्ष्य शहरी गरीब परिवारों कि गरीबी और जोखिम को कम करने के लिए उन्हें लाभकारी स्वरोजगार और कुशल मजदूरी रोजगार के अवसर का उपयोग करने में सक्षम करना, जिसके परिणामस्वरूप मजबूत जमीनी स्तर के निर्माण से उनकी आजीविका में स्थायी आधार पर सराहनीय सुधार हो सके। इस योजना का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से शहरी बेघरों हेतु आवश्यक सेवाओं से लैस आश्रय प्रदान करना भी होगा। योजना शहरी सड़क विक्रेताओं की आजीविका संबंधी समस्याओं को देखते हुए उनकी उभरते बाजार के अवसरों तक पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त जगह, संस्थागत ऋण, और सामाजिक सुरक्षा और कौशल के साथ इसे सुविधाजनक बनाने से भी संबंधित है।

दीनदयाल अंत्योदय योजना डीएवाई-एनयूएलएम के घटक

इस योजना में दो घटक हैं, एक ग्रामीण भारत के लिए तथा दूसरी शहरी भारत के लिए

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना के रूप में नामित शहरी घटक को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय (एच.यू.पी.ए.) द्वारा लागू किया जाएगा।
  • दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के रूप में नामित ग्रामीण घटक को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा।

दीनदयाल अंत्योदय योजना का मुख्य विशेषताएँ

  • कौशल प्रशिक्षण और स्थापन के माध्यम से रोजगार – मिशन के तहत शहरी गरीबों को प्रशिक्षित कर कुशल बनाने के लिए 15 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रति व्यक्ति 18 हजार रुपये है। इसके अलावा, शहर आजीविका केंद्रों के जरिए शहरी नागरिकों द्वारा शहरी गरीबों को बाजारोन्मुख कौशल में प्रशिक्षित करने की बड़ी मांग को पूरा किया जाएगा।
  • सामजिक एकजुटता और संस्था विकास – इसे सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के गठन के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक समूह को 10,000 रुपये का प्रारंभिक समर्थन दिया जाता है। पंजीकृत क्षेत्रों के स्तर महासंघों को 50, 000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
  • शहरी गरीबों को सब्सिडी – सूक्ष्म उद्यमों (माइक्रो– इंटरप्राइजेज) और समूह उद्यमों (ग्रुप इंटरप्राइजेज) की स्थापना के जरिए स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए 2 लाख रुपयों की ब्याज सब्सिडी औऱ समूह उद्यमों पर 10 लाख रुपयों की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • शहरी निराश्रय के लिए आश्रय – शहरी बेघरों के लिए आश्रयों के निर्माण की लागत योजना के तहत पूरी तरह से वित्त पोषित है।
  • अन्य साधन – बुनियादी ढांचे की स्थापना के माध्यम से विक्रेताओं के लिए विक्रेता बाजार का विकास और कौशल को बढ़ावा और कूड़ा उठाने वालों और विकलांगजनों आदि के लिए विशेष परियोजनाएं।
दीनदयाल अंत्योदय योजना की प्रभावशीलता
  • शहरी गरीबों का स्वामित्व और लाभकारी भागीदारी और सभी प्रक्रियाओं में उनकी सहभागिता
  • संस्था निर्माण और क्षमता को मजबूत बनाने सहित कार्यक्रम के डिजाइन और कार्यान्वयन में पारदर्शिता
  • सरकारी पदाधिकारियों और समुदाय की जवाबदेही
  • उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ भागीदारी
  • सामुदायिक आत्मनिर्भरता, आत्म-निर्भरता, स्वयं सहायता और आपसी सहायता
दीनदयाल अंत्योदय योजना के  मार्गदर्शक सिद्धांत
  • राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) का मूल विश्वास यह है कि गरीब लोग उद्यमी होते हैं और उनकी अभिलाषा गरीबी से बाहर निकलने की होती है। इसमें चुनौती उनकी क्षमताओं का उपयोग करके उनके लिए सा‍र्थक और सुस्थिर जीविका के साधन पैदा करने की है।
  • राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) का यह विश्‍वास है कि किसी भी आजीविका कार्यक्रम को केवल समयबद्ध तरीके से ही आगे बढाया जा सकता है बशर्ते कि इसे गरीबों और उनके संस्‍थानों द्वारा संचालित किया जाए। ऐसे सुदृढ संस्‍थागत ढांचे गरीबों के लिए उनके निजी मानव, सामाजिक, वित्‍तीय और अन्‍य संपतियों को निर्मित करने में सहायक होते हैं। इस प्रकार ये उन्‍हें सरकारी और निजी क्षेत्रों से अधिकारों, हकदारियों, अवसरों और सेवाओं को प्राप्‍त करने में समर्थ बनाते हैं और साथ ही उनकी एकता सुगठित करते हैं, अभिव्‍यक्ति और लेन-देन की शक्ति को भी बढाते हैं।
  • संविधान (74वां संशोधन) अधिनियम, 1992 के अनुसार शहरी गरीबी उपशमन, शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी) का विधिक कार्य है। इसलिए शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी) को शहरों/कस्‍बों में रह रहे शहरी गरीबों से संबंधित उनके कौशल और जीविका सहित उनसे संबंधित समस्‍त मुद्दों और कार्यक्रमों के लिए एक प्रमुख भूमिका निभाने की आवश्‍यकता है।
  • एनयूएलएम का उद्देश्‍य कौशल विकास और ॠण की सुविधाओं के लिए शहरी गरीबों को व्‍यापक रूप से शामिल करना है। यह बाजार-आधारित कार्यों और स्‍वरोजगार के लिए शहरी गरीबों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने तथा सुगमता से ॠण प्राप्‍त करने की दिशा में प्रयास करेगा।
  • सड़क विक्रेता शहरी जनसंख्‍या का महत्‍वपूर्ण अंग हैं जो कि पिरामिड के धरातल पर हैं। सड़क विक्रय स्‍व-रोजगार का एक स्रोत प्रदान करता है और इस प्रकार यह बिना प्रमुख सरकारी हस्‍तक्षेप के शहरी गरीबी उपशमन के एक उपाय के रूप में कार्य करता है। शहरी आपूर्ति श्रृंखला में उनका प्रमुख स्‍थान होता है और ये शहरी क्षेत्रों के भीतर आर्थिक विकास की प्रक्रिया के अभिन्‍न अंग होते हैं। एनएलयूएम का उद्देश्‍य उन्‍हें अपने कार्य के लिए उपयुक्‍त स्‍थल प्रदान करना, संस्‍थागत ॠण सुलभ कराना, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और बाजार के उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए उनका कौशल बढाना होगा। तदनुसार एनयूएलएम का उद्देश्‍य चरण बद्ध तरीके से शहरी बेघर लोगों को अनिवार्य सुविधाओं से युक्‍त आश्रय प्रदान करना होगा।
  • एनयूएलएम मंत्रालयों/विभागों से संबद्ध योजनाओं/कार्यक्रमों और कौशल, आजीविकाओं, उद्यमिता विकास, स्‍वास्‍थ्‍य , शिक्षा, सामाजिक सहायता आदि के कार्य निष्‍पादित करने वाले राज्‍य सरकारों के कार्यक्रमों के साथ समाभिरूपता पर अत्‍यधिक बल देगा। ग्रामीण और शहरी गरीब लोगों की आजीविका के बीच एक सेतु के रूप में ग्रामीण-शहरी प्रवासियों के कौशल प्रशिक्षण को बढावा देने के लिए सभी संबंधित विभागों से एक संयुक्‍त कार्यनीति बनाए जाने का समर्थन करने का अनुरोध किया जाएगा।
  • एनयूएलएम का उद्देश्‍य शहरी बेघर लोगों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आश्रय के प्रचालन में सहायता प्रदान करने में निजी क्षेत्र की भागीदारी प्राप्‍त करना है। यह शहरी बेघर लोगों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आश्रय प्रदान करने तथा साथ ही ऐसे शहरी गरीब उद्यमियों को जो कि स्‍व-रोजगार प्राप्‍त करना तथा अपने निजी लघु व्‍यावसायिक अथवा विनिर्माण यूनिट स्‍थापित करना चाहते है, प्रौद्योगिकीय, विपणन और एकजुट सहयोग देने में सहायता प्रदान करने में निजी और सिविल समाज के क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी के लिए प्रयास करेगा।

दीनदयाल अंत्योदय योजना की निगरानी

मंत्रालय ने वास्तविक समय में और नियमित रूप से योजना की प्रगति की निगरानी के उद्देश्य से ऑनलाइन वेब आधारित प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) विकसित की थी। एमआईएस को 20 जनवरी 2015 को शुरू किया गया था। एमआईएस प्रशिक्षण प्रदाताओं, प्रमाणन एजेंसियों, बैंकों और संसाधन संगठनों जैसे हितधारकों को भी सीधे आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है, जिसे निगरानी और अन्य उद्देश्यों और योजना की प्रगति को ट्रैक करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों, राज्यों और एच.यू.पी.ए. मंत्रालय द्वारा भी संचालित किया जा सकता है।

इसके अलावा, डीएवाई-एनयूएलएम योजना के क्रियान्वयन की प्रभावी निगरानी हेतु निदेशालय राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ नियमित रूप से समीक्षा बैठकों और वीडियो सम्मेलनों का आयोजन करेगा।


Deen Dayal Antyodaya Yojana


Deen Dayal Antyodaya Yojana

Deen Dayal Antyodaya Yojana (DAY) with an aim to uplift the urban poor folks by enhancing sustainable livelihood opportunities through skill development. Keeping in view the objective of Make in India, Skill Development is essential for socio economic betterment. Deen Dayal Antyodaya Yojana was launched under the Ministry of Housing and Urban Poverty Alleviation (HUPA). Government of India has provisioned Rs.500 crore for the scheme.

The scheme is integration of the National Urban Livelihoods Mission (NULM) and National Rural Livelihoods Mission (NRLM).
National Urban Livelihoods Mission (NULM) is renamed as Deen Dayal Antyodaya Yojana-(DAY-NULM) and in Hindi as – Rashtriya Shahri Aajeevika Mission. Under the scheme urban areas extends the coverage to all the 4041 statutory cities and towns, there by covering almost the entire urban population. Currently, all the urban poverty alleviating programmes covered only 790 towns and cities.

Deen Dayal Antyodaya Yojana Mission of DAY-NULM

To reduce poverty and vulnerability of the urban poor households by enabling them to access gainful self employment and skilled wage employment opportunities, resulting in an appreciable improvement in their livelihoods on a sustainable basis, through building strong grassroots level. The mission would also aim to providing the shelter equipped with essential services to the urban homeless in a phased manner. The scheme also address the livelihood concern of the urban street vendors by facilitating with suitable space, institutional credit, and social security and skills to the urban street vendor for accessing emerging market opportunities.

Deen Dayal Antyodaya Yojana COMPONENT OF DAY-NULM

The scheme has two component one for urban India and other for rural India.

  • The Urban component named as Deen Dayal Antyodaya Yojana will be implemented by the Ministry of Housing and Urban Poverty Alleviation.
  • The rural component named as Deen Dayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana will be implemented by the Ministry of Rural Development.

Deen Dayal Antyodaya Yojana MAIN HIGHLIGHTS OF THE SCHEME

  • Employment through Skill Training and Placement – An expenditure of Rs.15, 000 per person is allowed on training of urban poor which is Rs.18, 000 in North-East and J&K. Moreover, Training urban poor to meet the enormous demand from urban citizens by imparting market-oriented skills through City Livelihood Centers.
  • Social Mobilization and Institution Development – It will be done through formation of Self-Help Groups (SHG) for training members and hand holding, an initial support of 10, 000 is given for each group. Assistance of Rs.50, 000 is provided to Registered Area Level Federations.
  • Subsidy to urban poor – An interest subsidy of 5% – 7% for setting up individual micro-enterprises with a loan of up to 2 lakh and for group enterprises with a loan limit of up to Rs.10 lakhs.
  • Shelters for urban homeless – Cost of construction of shelters for urban homeless is fully funded under the Scheme.
  • Other means – Development of vendor markets and also the promotion of skills for the vendors through setting up infrastructure and special projects for the rag picker and differently abled etc.

Deen Dayal Antyodaya Yojana Effectiveness of the Scheme

  • Ownership and productive involvement of the urban poor and their institutions in all processes
  • Transparency in programme design and implementation, including institution building and capacity strengthening
  • Accountability of government functionaries and the community
  • Partnerships with industry and other stakeholders
  • Community self-reliance, self-dependence, self-help and mutual-help

Deen Dayal Antyodaya Yojana GUIDING PRINCIPLES

  • The core belief of National Urban Livelihoods Mission (NULM) is that the poor are entrepreneurial and have innate desire to come out of poverty. The challenge is to unleash their capabilities to generate meaningful and sustainable livelihoods.
  • NULM believes that any livelihood promotion programme can be scaled up in a time bound manner only if driven by the poor and their institutions. Such strong institutional platforms support the poor in building up their own human, social, financial, and other assets. This in turn, enables them access to rights, entitlements, opportunities and services from the public and private sectors, while enhancing their solidarity, voice and bargaining power.
  • As per the Constitution (74th Amendment) Act, 1992, urban poverty alleviation is a legitimate function of the Urban Local Bodies (ULB). Therefore, ULBs would need to undertake a lead role for all issues and programmes concerning the urban poor in cities/towns, including skills and livelihoods.
  • NULM would aim at universal coverage of the urban poor for skill development and credit facilities. It will strive for skills training of the urban poor for market-based jobs and self-employment, facilitating easy access to credit.
  • Street vendors constitute an important segment of the urban population. Street vending provides a source of self-employment, and thus acts as a measure of urban poverty alleviation without major Government intervention. They have a prominent place in the urban supply chain and an integral part of the economic growth process within urban areas. NULM would aim at facilitating access to suitable spaces, institutional credit, social security and skills to the urban street vendors for accessing emerging market opportunities. Accordingly, NULM would aim at providing shelter equipped with essential services to the urban homeless in a phased manner.
  • NULM would place a very high emphasis on convergence with schemes/programmes of the relevant line Ministries/Departments and programmes of state governments dealing with skills, livelihoods, entrepreneurship development, health, education, social assistance, etc. An alliance strategy will be sought with all concerned departments to promote skills training of rural-urban migrants as a bridge the gap between the livelihoods of the rural and urban poor.
  • NULM would aim at partnership with the private and civil society in providing shelters, skill training, and also in facilitating technological, marketing and hand holding support for the urban poor entrepreneurs who want to be self-employed and set up their own small businesses or manufacturing units.

Deen Dayal Antyodaya Yojana Monitoring of the Scheme

The Ministry had developed an online web based Management Information System (MIS) for the purpose of monitoring real time and regular progress of the scheme. MIS was launched on 20 January 2015.MIS also enables stakeholders such as training providers, certification agencies, banks, resource organizations to feed required information directly which can be accessed by urban local bodies, States and Ministry of HUPA for monitoring and other purposes and to track the progress.
Moreover, for effective monitoring of the implementation of the scheme DAY-NULM Directorate regularly conduct review meetings and video conferences with the State/UTs.

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