December 9, 2016
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बाल शोषण दिवस पर कविता Slogen निबंध और बाल शोषण मुक्ति अभियान पर व्याख्या

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बाल शोषण का अर्थ – BAl Shoshan Means

बाल शोषण का अभिप्राय बारह वर्ष से कम उम्र के बच्चो के साथ मानसिक ,शारीरिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार करना है | कम उम्र के बच्चो का बड़े बड़े कारखानों ,के मालिको द्वारा बाल शोषण किया जाता हैं | बाल शोषण के आलावा गरीब ,और असहाय बच्चो का योंन शोषण भी किया जाता हैं जो घोर अन्याय , और क़ानूनी अपराध हैं इस बाल शोषण को मिटाने के लिय सरकार ने बाल शोषण के खिला़फ हर वर्ष जनजागरण अभियान और कई रैलिया निकाली जाति हैं | और 12 जून को पुरे विश्व में बाल श्रम के खिलाफ विश्व बाल श्रम दिवस मनाया जाता हैं |

बाल शोषण दिवस : BAl Shoshan Divas

विश्व बाल शोषण दिवस 12 जून को मनाया जाता हैं |
हमारे देश मैं फैली भयंकर बेरोजगारी ,भुकमरी और गरीबी के कारण लोगो को समय पर रोजगार नहीं मिल रहा हैं जिसके कारण उनके बच्चो का और स्वयम का विकाश नहीं हो पा रहा हैं इस परेशानी में आकर गरीब आदमी अपने बच्चों को मजदूरी करवाने के लिए मजबूर हो जाता हैं और मजदुर बच्चे का पेसे वाले लोग उन बच्चो का शोषण करते रहते हैं | इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बाल शोषण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाय हैं | और बाल श्रम अधिनियम बनाया हैं |

बाल शोषण के खिला़फ जनजागरण – Awareness Against BalShoshan

बाल शोषण आज हमारे लिए कोई अंजान शब्द नहीं है, बल्कि यह आधुनिक समाज का एक विकृत और ख़ौ़फनाक सच बन चुका है. मौजूदा दौर में निर्दोष एवं लाचार बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की घटनाएं इतनी आम हो चुकी हैं कि अब तो लोग इस ओर ज़्यादा ध्यान भी नहीं देते. जबकि वास्तविकता यह है कि बाल शोषण बच्चों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है. हाल में देश में पहली बार बाल शोषण के मामलों की गहराई से जांच-पड़ताल के लिए कुछ पहल की गई हैं. 13 राज्यों में किए गए इस अध्ययन से संभव है कि इससे संबद्ध सभी पक्षों जैसे, परिवार, समुदाय, समाज एवं सरकार को मामले की गंभीरता और उसकी वास्तविकता का पता चले.

बाल शोषण – BAl Shoshan

आमतौर पर माना जाता है कि बाल शोषण का मतलब बच्चों के साथ शारीरिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार है, लेकिन सीडीसी (कंसलटेंसी डेवलपमेंट सेंटर) के अनुसार, बच्चे के माता-पिता या अभिभावक द्वारा किया गया हर ऐसा काम बाल शोषण के दायरे में आता है, जिससे उसके ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता हो या ऐसा होने की आशंका हो या जिससे बच्चा मानसिक रूप से भी प्रताड़ित महसूस करता हो. भारत में हालत ऐसी है कि अक्सर बाल शोषण के वजूद को ही को सिरे से नकार दिया जाता है, लेकिन सच यह है कि ख़ामोश रहकर हम बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की वारदातों को बढ़ावा ही दे रहे हैं.

बाल शोषण अभियान – BAl Shoshan Mission

बाल विकास मंत्रालय द्वारा यूनीसेफ के सहयोग से कराए गए इस अध्ययन में कई संवेदनशील तथ्य सामने आए हैं. यह पहला मौक़ा है, जब सरकार ने इतने विस्तृत पैमाने पर बाल शोषण के विवादित मसले पर कोई पहल की है. अध्ययन के परिणामों से जो बात सबसे ज़्यादा उभर कर सामने आई है, वह यह है कि 5 से 12 साल तक की उम्र के बच्चे बाल शोषण के सबसे ज़्यादा शिकार होते हैं. हैरत की बात यह है कि हर तीन में से दो बच्चे कभी न कभी शोषण का शिकार रहे हैं. अध्ययन के दौरान लगभग 53.22 प्रतिशत बच्चों ने किसी न किसी तरह के शारीरिक शोषण की बात स्वीकारी तो 21.90 प्रतिशत बच्चों को भयंकर शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा. इतना ही नहीं, क़रीब 50.76 प्रतिशत बच्चों ने एक या दूसरे तरह की शारीरिक प्रताड़ना की बात कबूली. बात इतने पर ही ख़त्म नहीं होती. मंत्रालय की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक़, देश का हर दूसरा बच्चा भावनात्मक शोषण का भी शिकार है.

बाल उत्पीड़न – Bal Uthpidan

बाल शोषण का मतलब बच्चों के साथ शारीरिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार है, लेकिन सीडीसी (कंसलटेंसी डेवलपमेंट सेंटर) के अनुसार, बच्चे के माता-पिता या अभिभावक द्वारा किया गया हर ऐसा काम बाल शोषण के दायरे में आता है, जिससे उसके ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता हो या ऐसा होने की आशंका हो या जिससे बच्चा मानसिक रूप से भी प्रताड़ित महसूस करता हो. भारत में हालत ऐसी है कि अक्सर बाल शोषण के वजूद को ही को सिरे से नकार दिया जाता है, लेकिन सच यह है कि ख़ामोश रहकर हम बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की वारदातों को बढ़ावा ही दे रहे हैं. देश में बाल शोषण की घटनाओं को ऐसे अंजाम दिया जाता है कि दोषी के साथ-साथ पीड़ित बच्चे भी खुलकर सामने नहीं आते. पीड़ित बच्चे शर्मिंदगी के चलते कुछ भी बोलना नहीं चाहते. इसके पीछे भी हमारी सामाजिक बनावट और मानसिकता काफी हद तक ज़िम्मेदार है. हम भी ऐसे बच्चों को कुछ अलग नज़र से देखने लगते हैं. संभवत: इसी लज्जा के चलते उन्हें दुनिया की निगाहों में ख़ौ़फ नज़र आता है. पश्चिमी देशों में हालात ऐसे नहीं हैं. शिक्षा के कारण वहां का समाज और वहां के बच्चे निडर होकर अपनी बात कह सकते हैं. वहां के बच्चों में कम से कम इतना साहस तो होता ही है कि वे दुनिया को खुलकर अपनी आपबीती बता सकें.

बाल शोषण पर कविता – Kavita on Bal Shoshan

बाल यौन शोषण पर कविता

क्यों नहीं हवा का तेज झोंका आता, हैवान को अपने साथ उड़ा ले जाता ,

क्यों नहीं भूकंप का एक तेज झटका आता और हैवान को मेरे शरीर से दूर ले जाता ,

क्यों नहीं जानवरों का एक झुण्ड आता और हैवान को अपने पैरों तले कुचल देता

क्यों नहीं नदियों में तेज आती बाढ और हैवान को अपने साथ बहा ले जाती ,

क्यों नहीं किसी बड़े पेड़ की डाल टूटकर हैवान के ऊपर गिर जाती ,

क्यों नहीं कोई दैवीय चमत्कार होता और हैवान का सर कलम हो जाता ,

क्यों नहीं मेरा शरीर पत्थर बन जाता और हैवानियत का खेल धरा रह जाता ,

क्यों नहीं धरती मान का ह्रदय फट जाता और मेरा शरीर उसमें समा जाता ,

क्यों सृष्टि ऐसे हैवान की रचना करती है जिसकी हैवानियत की कोइ सीमा नहीं ?

बाल शोषण पर स्लोगन और फोटो पोस्टर – Slogen और पोस्टर on Bal Shoshan

  1. पढ़ाई पर अब ध्यान धरें, मजदूरी करना बंद करें ।
  2. बच्चे हैं देश का भविष्य, उच्च लक्ष्य को बनायें इष्ट ।
  3. जीवन में आगे बढ़ें, ज्ञानवान और सक्षम बनें ।
  4. मेहनत श्रम जीवन में आवश्यक, शिक्षा का है अपना महत्त्व।
  5. बाल श्रम को ख़त्म करें, उनका जीवन नष्ट न करें ।
  6. आप समर्थ हों तो किसी गरीब बालक को पढ़ाएँ, ताकि धन के अभाव में वह मजदूरी पर न जाए ।
  7. बच्चे हैं भगवान स्वरुप, श्रम करवाना नहीं अनुरूप

बाल शोषण पर निबंध – Essay on BalShoshan

भारत एक क्रषि प्रदान देश हैं भारत की अधिकांश जनता क्रषि पर निर्भर हैं भारत की 70 प्रतिशत आबादी खेती और मजदूरी कर अपना गुज़ारा करती हैं जिसमे 30 प्रतिशत आबादी एसी हैं जिसके पास न खेती हैं और नहि कमाने का कोई साधन,सिर्फ मजदूरी हि उनका जीवनयापन का साधन हैं बढती हुई महंगाई के हिसाब से कम मजदूरी होने के कारण उनका सिर्फ खाने का हि काम चलता हैं लैकिन उनके बच्चो की पढाई और उनका भविष्य पेसे की कमी के कारण नरक हो जाता हैं प्रतिदिन बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। गरीब बच्चे सबसे अधिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। गरीब बच्चियों का जीवन भी अत्यधिक शोषित है। छोटे-छोटे गरीब बच्चे स्कूल छोड़कर बाल-श्रम हेतु मजबूर हैं।बाल-श्रम, मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है। यह बच्चों के मानसिक, शारीरिक, आत्मिक, बौद्धिक एवं सामाजिक हितों को प्रभावित करता है। बच्चे आज के परिवेश में घरेलू नौकर का कार्य कर रहे हैं। वे होटलों, कारखानों, सेवा-केन्द्रों, दुकानों आदि में कार्य कर रहे हैं, जिससे उनका बचपन पूर्णतया प्रभावित हो रहा है।

बाल शोषण पर कानून 

भारत के संविधान, 1950 का अनुच्छेद 24 स्पष्ट करता है कि 14 वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे को ऐसे कार्य या कारखाने इत्यादि में न रखा जाये जो खतरनाक हो। कारखाना अधिनियम, बाल अधिनियम, बाल श्रम निरोधक अधिनियम आदि भी बच्चों के अधिकार को सुरक्षा देते हैं किन्तु इसके विपरीत आज की स्थिति बिलकुल भिन्न है।पिछले कुछ वर्षों से भारत सरकार एवं राज्य सरकारों की पहल इस दिशा में सराहनीय है। उनके द्वारा बच्चों के उत्थान के लिए अनेक योजनाओं का प्रारंभ किया गया हैं, जिससे बच्चों के जीवन व शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव दिखे। शिक्षा का अधिकार भी इस दिशा में एक सराहनीय कार्य है। इसके बावजूद बाल-श्रम की समस्या अभी भी एक विकट समस्या के रूप में विराजमान है।इसमें कोई शक नहीं कि बाल-श्रम की समस्या किसी भी देश व समाज के लिए घातक है। बाल-श्रम पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। बाल-श्रम की समस्या जड़ से समाप्त होना अति आवश्यक है।

विश्व बाल मुक्ति दिवस – World Children’s Liberation Day

विश्व बाल मुक्ति दिवस 12 जून को मना या जाता हैं |

भारत के प्रथम प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरु ,जो बच्चों में चाचा नेहरू के नाम से जाने जाते थे।बच्चों के प्रति उनके असीम स्नेह के कारण उनके जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।उन्होंने हमेशा अपने देश के बच्चों को देश के भावी कर्णधार के रूप में देखा,और उनके बचपन को सर्व सुविधा संपन्न करने के लिए प्रयास रत रहे।उनके अनुसार यदि हमारा बचपन अभावों,शोषण या कष्टों में व्यतीत होगा तो वे देश को नयी ऊचाइयों तक ले जाने में कैसे सक्षम होंगे।उन्होंने हमेंशा चाहा वर्तमान के बच्चों का बचपन ,उनका चरित्र निर्माण, उचित शारीरिक विकास और मानसिक विकास के लिए आरक्षित होना चाहिए,ताकि वे भविष्य में देश के स्वस्थ्य और आदर्श नागरिक बन सकें।देश के विकास में समुचित योगदान दे सकें।

बाल शोषण के खिलाफ अधिकार – Rights Against on Balshoshan

शोषण के विरुद्ध अधिकार, अनुच्छेद 23-24 में निहित हैं, इनमें राज्य या व्यक्तियों द्वारा समाज के कमजोर वर्गों का शोषण रोकने के लिए कुछ प्रावधान किए गए हैं। अनुच्छेद 23 के प्रावधान के अनुसार मानव तस्करी को प्रतिबन्धित है, इसे कानून द्वारा दंडनीय अपराध बनाया गया है, साथ ही बेगार या किसी व्यक्ति को पारिश्रमिक दिए बिना उसे काम करने के लिए मजबूर करना जहां कानूनन काम न करने के लिए या पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए हकदार है, भी प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, यह राज्य को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए सेना में अनिवार्य भर्ती तथा सामुदायिक सेवा सहित, अनिवार्य सेवा लागू करने की अनुमति देता है। बंधुआ श्रम व्यवस्था (उन्मूलन) अधिनियम, 1976, को इस अनुच्छेद में प्रभावी करने के लिए संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है। अनुच्छेद 24 कारखानों, खानों और अन्य खतरनाक नौकरियों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है। संसद ने बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 अधिनियमित किया है, जिसमें उन्मूलन के लिए नियम प्रदान करने और बाल श्रमिक को रोजगार देने पर दंड के तथा पूर्व बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए भी प्रावधान दिए गए हैं।

बाल शोषण Divas पर पोस्टर : Poster,Image on Bal Shoshan

1.  बाल शोषण बाल मजदूरी

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

2. बाल श्रम मजदुरी Baal Majdoori image Photo In India

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

3.बाल मजदुरी शोषण

 

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

4. बाल विवाह शोषण Baal Vivah Image In India

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

5. बाल शोषणकारी शक्तियां

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

6. बाल योंन शोषण Baal yon Shoshan

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

7.  बाल योंन उत्पीड़न Baal Yon Utpeedan

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

8. शोषण के विरुद्ध अधिकार Baal Shoshan Ke Virudh Rights And Adhikaar

World Bal Shoshan Divas Kavita Slogen Essay Poster

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