December 9, 2016
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भारत में महिला शिक्षा Stri Shiksha Ka Mahtv,Stri Shiksha par Eassy,Poem,Slogen Poster in Hindi

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  • स्त्री शिक्षा का महत्व पर निबंध – Eassy Nibandh on Women Education
  • नारी शिक्षा स्लोगन – Slogen on Women Education
  • स्त्री शिक्षा पर कविता – Poem on Women Education
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भारत में नारी (स्त्री ,महिला )शिक्षा पर पोस्टर,कविता,स्लोगन, निबंध और महिला शिक्षा का महत्व Women Education In India

भारतीय समाज में नारी (स्त्रि) को सर्वोपरी स्थान दिया गया हैं भारतवर्ष में नारी को धर्मपत्नी, गृह देवी,गृह लक्ष्मी,अर्धांगनी,गृहणि,आदि कई सम्मानित नामो से नवाजा गया हैं | भारत देवी देवताओ का पूजन्यीय स्थान हैं ,भारत में ऐसा कहा जाता हैं कि जंहा स्त्रियों की पूजा होती है वंहा देवता निवास करते हैं । हमारे देश में प्राचीन काल से ही नारी को समाज में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया हैं | नारी सम्मान के साथ साथ भारत में प्राचीन काल से ही स्त्रि शिक्षा पर भी बहुत जोर दिया हैं |प्राचीन समय में नारी शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता था । परन्तु मध्यकाल में स्त्रियों की स्थिति दयनीय हो गयी । उसका जीवन घर की चारदीवारी तक सिमित हो गया । नारी को परदे में रहने के लिए विवश किया गया । स्त्री-पुरुष जीवन-रूपी रथ के दो पहिये हैं, इसलिए पुरुष के साथ साथ स्त्री का भी शिक्षित होना जरुरी है

महिला शिक्षा का महत्व – Mahila Shiksha ka Mahtv Importancy

भारतीय समाज में महिला शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व हैं | शिक्षा एक ऐसा रत्न है जो इन्सान और जानवर में फर्क निश्चित करती है। शिक्षा के बिना इन्सान जानवरों से भी बद्तर है। शिक्षा इंसान की प्राथमिक जरूरत है। शिक्षा नारी हो या पुरुष दोनों के लिए ही जरुरी है। हमारे समाज में पुरुष शिक्षा पर अधिक जोर दिया जाता हैं लकिन वर्तमान में भारत में महिला शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जा रहा हैं भारत सरकार ने महिला शिक्षा पर कई अभियान चला रखे हैं ,जेसे – साक्षरता मिसन ,बेटी बचाओ बेटी पढाओ आदि ,

भारत की बेटियो को साक्षर करने के लिए सरकार ने एक नारा दिया – बेटी बचाओ बेटी पढाओ |

जिस घर में होता बेटी का सम्मान, वह घर होता स्वर्ग समान |
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, समाज को प्रगति के रास्ते ले जाओ ||

स्वर्ग में चाहते हो स्थान, नारी का करो सम्मान |
बेटी है स्वर्ग की सीढ़ी, वह पढ़ेगी , तो बढ़ेगी अगली पीढ़ी ||

विकसित राष्ट्र की हो कल्पना, बेटियों को होगा पढ़ना |
राष्ट्र को प्रगति के रास्ते हो ले जाना, नारी को बराबरी का दर्जा होगा देना ||

परन्तु हमारे समाज में पुरुष शिक्षा पर तो प्रारंभ से ही बल दिया जाता रहा है परन्तु स्त्री शिक्षा पर कोई ठोस सोच विचार नहीं किया गया। प्राचीन समय में स्त्रियों की शिक्षा होती थी परन्तु मध्य काल में स्त्रियों की स्तिथि दयनीय हो गयी थी समय चलते स्त्रियों का समाज में अपमान होने लगा , स्त्री घर तक ही सिमित रह गयी और उसकी शिक्षा पर भी बल नहीं दिया गया , नारी को परदे में रहने के लिए विवश किया गया छोटी उम्र में ही उसकी शादी कर दी जाती और उसको पति के रहमो कर्म पर ही पलना पड़ता था |

लेकिन आज भी कुछ गाँव ऐसे हैं जहाँ पेसे वाले समाज की महिलाएं तो शिक्षित हैं, परन्तु कुछ ग्रामों में महिला शिक्षा उपलब्ध नहीं, वहां सिर्फ घर के कामो तक ही औरत को सीमित रखा जाता है। स्त्री शिक्षा के बिना एक प्रगति पूर्ण समाज की स्थापना नही की जा सकती। स्त्री और पुरुष जीवन रूपी रथ के दो पहिये है इसलिए स्त्री और पुरुष दोनों का शिक्षित होना जरूरी है। स्त्री का शिक्षित होना आज एक सुदृढ़ शांति पूर्ण समाज कि स्थापना करने में सहयोग पूर्ण है। अशिक्षा कई समस्याओं और कुरतियों को जन्म देती है। समाज में स्त्रियों के प्रति कई कुरूतियाँ फैल चुकी है जैसे दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, वधु हत्या इत्यादिे
शिक्षा द्वारा शिक्षित स्त्री इन करुतियों को समाज में से उखाड़ फेंकने से सहायक हो सकती है

स्त्री शिक्षा का महत्व पर निबंध – Eassy Nibandh on Women Education

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता –

अथार्थ जहां स्त्रीजाति का आदर-सम्मान होता है, उनकी आवश्यकताओं-अपेक्षाओं की पूर्ति होती है, उस स्थान, समाज, तथा परिवार पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं । जहां ऐसा नहीं होता और उनके प्रति तिरस्कारमय व्यवहार किया जाता है, वहां देवकृपा नहीं रहती है और वहां संपन्न किये गये कार्य सफल नहीं होते हैं ।

समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सुनने को मिलती हैं । सम्मान तो हर व्यक्ति को मिलना चाहिए, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध, धनी हो या निर्धन, आदि । किंतु देखने को यही मिलता है कि व्यक्ति शरीर से कितना सबल है, वह कितना धनी है, बौद्धिक रूप से कितना समर्थ है, किस कुल में जन्मा है, आदि बातें समाज में मनुष्य को प्राप्त होने वाले सम्मान का निर्धारण करते हैं । सम्मान-अपमान की बातें समाज में हर समय घटित होती रहती हैं, किंतु स्त्रियों के साथ किये जाने वाले भेदभाव की बात को विशेष तौर पर अक्सर उठाया जाता है । ये सब बाते  लोगों के मुख से प्रायः सुनने को मिल जाती  है ।

प्राचीन समय में नारी शिक्षा पर विशेष बल दिया गया था । परन्तु मध्यकाल में स्त्रियों की स्थिति दयनीय हो गयी । उसका जीवन घर की चारदीवारी तक सिमित हो गया । नारी को परदे में रहने के लिए विवश किया गया । स्त्री-पुरुष जीवन-रूपी रथ के दो पहिये हैं, इसलिए पुरुष के साथ साथ स्त्री का भी शिक्षित होना जरुरी है ।यदि माता सुशिक्षित होगी तो उसकी संतान भी सुशील और शिक्षित होगी । शिक्षित गृहणी पति के कार्यों में हाथ बंटा सकती है, परिवार को सुचारु रूप से चला सकती है । स्त्री-शिक्षा प्रसार होने से नारी आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनेगी। अपने अधिकारों और कर्त्तव्यों के प्रति सचेत होगी । आदर्श गृहणी परिवार का आभूषण और समाज का गौरव होती है ।स्त्री के लिए किताबी शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा भी बहुत जरुरी है । स्त्री गृह कार्य में कुशल होने के साथ साथ वह समाजसेवा में भी योगदान दे सके । नारी का योगदान समाज में सबसे ज्यादा होता है । बच्चों के लालन-पालन, शिक्षा से लेकर नौकरी तक नारी हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे है । अतः नारी को कभी कम नहीं आंकना चाहिए और उसका सदा सम्मान करना चाहिए ।

स्त्री शिक्षा पर कविता – Poem on Women Education

कल तक जो थी नादान
बना रही आज खुद की पहचान
मिला नहीं उन्हें कभी सम्मान
होता रहा सदा घोर अपमान
शिक्षा से बन रही अब महान
समाज में बढ़ रहा उनका सम्मान |

लड़कों से आगे है नारी
शिक्षा से हर क्षेत्र में बाजी मारी
अपनी भूमिका निभाती सारी
इनसे ही होती दुनिया प्यारी
शिक्षा से आई नई जान
बना रही आज खुद की पहचान |

शिक्षा पर अगर न होता विश्वास
न हो पाती जागरूक,न हो पाता विकास
न हो पाती दहलीज के पार
मिल न पाता सही अधिकार
न कर पाती देश का उद्धार
होती रहती शोषण का शिकार
कर न पाएँगे रूढ़िवादी उनका अपमान
समाज में बढ़ रहा अब उनका सम्मान |

खत्म होगी पुरुषों पर निर्भरता
खत्म होगी शिक्षा से निर्धनता
कर रही अब कुरीतियों का दमन
खुल गए रास्ते,उड़ने को खुला गगन
खेलों में भी हो रहा नाम
संभाल लेंगी एक दिन देश की कमान
कल तक जो थी नादान
हो रहा अब उनका सम्मान |

चुप नहीं रहेंगी अब बहुत हुआ सहना
तोड़ देंगी बेड़ियां,मन लुभाने वाला गहना
अनेकों नारियों ने किया पर्यास
बढ़ती रहे आजादी बढ़ता रहे विश्वास
कर रही अब हर बाधा का सामना
बढ़ता रहे शिक्षा का प्रसार करती यही कामना
कल तक जो थी नादान
देश में हो रहा अब उनका सम्मान |

नारी शिक्षा स्लोगन – Slogen on Women Educationसुनहरे भारत का सपना,

जरुरी हो सबका पढ़ना.विकास का होगा सुगम रास्ता,जब जन-जन में फैले साक्षरता.

आओ बढायें इस समाज का मान ,देकर हर व्यक्ति को अक्षर ज्ञान.

साक्षर समाज हो जब पहली शर्त,समस्या समाधान हो पर्त दर पर्त.

सुंदर होगा हमारा कल और आज,हर सर जब पहने साक्षरता का ताज

समाज का बढाओ तुम मान,देकर हर बच्चे को अक्षर ज्ञान

अगर देश को है प्रगति की चाह,हर कदम बढे साक्षरता की राह

गंवाया जिसने अक्षर ज्ञान का मौक़ा,खाता रहेगा वह हर राह पर धोखा

आएगी जन-जन में जागरूकता,हासिल होगी जब सर्वसाक्षरता

 

बालिका शिक्षा का महत्व

बालिका शिक्षा : बालिका शिक्षा का हमारे देश में अत्यन्त महत्व है। आज भी हमारे देश में लड़के और लड़कियों में भेदभाव किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों मे तो लड़कियों की स्थिति सोचनीय हो जाती है। ग्रामीण परिवेश में लोग शिक्षा के महत्व से परिचित नहीं हो पाते हैं। उनकी दृष्टि में पुरूषों को शिक्षा की जरूरत होती है क्योंकि वे नौकरी करने अथवा काम करने बाहर जाते हैं, जबकि लड़कियां तो घर में रहती हैं और शादी के बाद घर के काम-काज में ही उनका ज्यादातर समय बीत जाता है।
आज समय तेजी से बदल रहा है। पुरूषों के बराबर स्त्रियों की भी शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार द्वारा ऐसे अनेक योजनाएँ चलाए जा रहे हैं जिससे बालिकाओं के निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। लोगों में जागरूकता फैलाने का काम स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही हैं। आम चुनावों में महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा है। इन सब ने आज ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों का रूझान पढ़ाई की ओर कर दिया है। आज की लड़कियां घर और बाहर दोनों को संभाल रही हैं। सरकार द्वारा बालिका कल्याण हेतु अनेक योजनाएँ चलाए जा रहे हैं।
इन सब का परिणाम है कि दो दशक पूर्व और आज के बालिकाओं की स्थिति की तुलना करें तो हमें क्रांतिकारी परिवर्तन दिखाई पड़ेंगे । आज का समाज तेजी से बदल रहा है। आज महिलाओं को पुरूषों के समकक्ष माना जा रहा है। बालिका शिक्षा से आज देश प्रगति की ओर बढ़ रहा है। बाल विवाह, दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न जैसी घटनाओं में कमी और जागरूकता आयी है। महिलाओं को समाज के अभिन्न अंग के रूप में पूरे विश्व में स्वीकार किया जाने लगा है। अतः हम पूरे विश्व में कहीं भी चले जाएंगे ऐसे परिवर्तन दिख जाएंगे ।

वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित

वाद विवाद प्रतियोगिता में भी महिलाओ को हिस्सा लेना चाहिए क्योकि इस प्रतियोगिता में भाग लेने से महिलाओ की वाक्पटुता खुलती हैं और वे हजारो लोगो के सामने भी अपने विचार वयेक्त क्र सकती हैं | ये भी विचार सामने आये कि शिक्षा में प्रतिस्पर्धा हो लेकिन उस तरह की भी न हो कि वह अपने सामाजिक सरोकारों से दूर हो जाएं। चाहे छात्र अच्छे अंक प्राप्त न कर सके लेकिन उसमें मानवीय गुणों के साथ साथ सुसंस्कृत नागरिक बनने के गुण अवश्य विद्यमान हो। इस प्रतिस्पर्धा में बच्चों में नैतिक मूल्यों का भी विकास होना चाहिए।

प्रतिभागी शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा का व्यापक फैलाव होने के बावजूद विद्यार्थी मानवीय मूल्य खोते जा रहे हैं। शिक्षित बेरोजगारों की स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। वर्तमान में विद्यार्थियों का भविष्य निर्माण के फेर में चरित्र निर्माण पीछे छूटा जा रहा है। शिक्षा प्रणाली की दौड़ में वह जीत तो जाता है लेकिन पीछे वह अन्य बाजियां हार जाता है। महंगाई के दौर में वह शिक्षा को जीवन जीने का जरीया समझने लगा है और यही कारण है कि वह समाज से दूर होता चला जाता है।
शिक्षकों ने कहा कि जीवन का अर्थ समझाने वाली विद्या के आने से समाज व शिक्षा प्रणाली का तंत्र बिखर गया है। यह शिक्षा प्रणाली का नहीं वरन् हमारी मानसिकता का दोष है। हमनें अपने बच्चों को प्रतिस्पर्धा की दौड़ में धकेल दिया है। उपभोक्तावाद की अंधी दौड़ में विद्यार्थी पिसता जा रहा है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली पश्चिम की देन है, जिसने हमारी संस्कृति को तोड़ने का काम किया है। शिक्षा तंत्र में बदलाव करना होगा। नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में जोड़ना होगा।

शिक्षित स्त्रि होने के फायदे – Value Fayde of Stri shiksha Women Education

  • यदि माता सुशिक्षित होगी तो उसकी संतान भी सुशील और शिक्षित होगी ।
  • शिक्षित गृहणी पति के कार्यों में हाथ बंटा सकती है, परिवार को सुचारु रूप से चला सकती है ।
  • स्त्री-शिक्षा प्रसार होने से नारी आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनेगी।
  • अपने अधिकारों और कर्त्तव्यों के प्रति सचेत होगी ।

स्त्री के लिए किताबी शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा भी बहुत जरुरी है । स्त्री गृह कार्य में कुशल होने के साथ साथ वह समाजसेवा में भी योगदान दे सके । नारी का योगदान समाज में सबसे ज्यादा होता है । बच्चों के लालन-पालन, शिक्षा से लेकर नौकरी तक नारी हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे है । अतः नारी को कभी कम नहीं आंकना चाहिए और उसका सदा सम्मान करना चाहिए ।

नारी-शिक्षा अनिवार्य हैं : Nari Siksha Compulsary

भारतीय स्त्री एक आदर्श नारी के रूप में जानी जाती हैं l प्राचीन काल से नारियाँ घर -गृहस्थी को ही देखती नहीं आ रहीं,अपितु समाज ,राजनीति,धर्म,कानून,न्याय सभी क्षेत्रों में वे पुरुष की संगिनी के रुप में सहायक व प्रेरक भी रहीं हैं  परन्तु समय के बदलाव के साथ नारी पर आत्याचार व शोषण का आंतक भी बढ़ता रहा है l नारी पारिवारिक ढ़ाँचे की यथास्थिति से समझौता करती रही है या फिर सन्तानविहीन व बन्ध्या जीवन व्यतीत करने को मजबूर हुई है  यहाँ तक कि नारी शैक्षणिक ,सामाजिक,आर्थिक,पारिवारिक सभी स्तरों पर उपेक्षित जीवन व्यतीत करती है l जब बात शैक्षणिक शोषण की होती है तो एक ही सवाल मन में उठता है कि अगर नारी को शोषण और अत्याचारों के दायरे से मुक्त करना है तो सबसे पहले उसे शिक्षित करना होगा चूकिं शिक्षा का अर्थ केवल अक्षर ज्ञान नहीं होता अपितु शिक्षा का अर्थ जीवन के प्रत्येक पहलू की जानकारी होना है व अपने मानवीय अधिकारों का प्रयोग करने की समझ होना है l शिक्षा सफलता की कुँजी है l बिना शिक्षा के जीवन अपंग है l जीवन के हर पहलू को समझने की शक्ति शिक्षा के द्वारा ही प्राप्त होती है l ऐसा माना जाता है कि शिक्षा एक विभूति है और शिक्षित विभूतिवान  जहाँ आज समाज का एक नारी-वर्ग शिक्षित होकर समाज में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है, परन्तु वहाँ एक वर्ग ऐसा भी देखने को मिलता है जो आज भी अशिक्षा के दायरे में सिमट कर मूक जीवन व्यतीत कर रहा है ,और सवाल यह उठता है कि उनकी स्थिति में कितना सुधार हो रहा है ? हम प्रत्येक वर्ष महिला-दिवस बहुत धूमधाम और खुशी से मनाते हैं पर उस नारी-वर्ग की खुशियों का क्या जो अशिक्षा के कारण अपने मानवीय अधिकारों से वंचित महिला-दिवस के दिन भी गरल के आँसू पीती है l ऐसे समाज में पुरुष स्वयं को शिक्षित ,सुयोग्य एवं समुन्नत बनाकर नारी को अशिक्षित,योग्य एवं परतंत्र रखना चाहता है  शिक्षा के अभाव में भारतीय नारी असभ्य,अदक्ष अयोग्य,एवं अप्रगतिशील बन जाती है  वह आत्मबोध से वंचित आजीवन बंदिनी की तरह घर में बन्द रहती हुई
चूल्हे-चौके तक सीमित रहकर पुरुषों की संकीर्णता का दण्ड भोगती हुई मिटती चली जाती है  पुरुष नारी को अशिक्षित रखकर उसके अधिकार तथा अस्तित्व का बोध नहीं होने देना चाहता  वह नारी को अच्छी शिक्षा देने के स्थान पर उसे घरेलू काम-काज में ही दक्ष कर देना ही पर्याप्त समझता है l प्राचीन काल से ही नारी के प्रति समाज का दृष्टिकोण रहा है,’ नारियों के लिए पढ़ने की क्या जरूरत ,उन्हें कोई नौकरी-चाकरी तो करनी नहीं, न किसी घर की मालकिन बनना है ,उसके लिए तो घर ‘गृहस्थी’ का काम सीख लेना ही पर्याप्त है l’ एक तरह से समाज की यह विचारधारा ही शैक्षणिक शोषण के आधार को और भी मजबूत कर देती है l

भारतीय समाज में स्त्रीयो का शोषण :

शैक्षणिक शोषण के अन्तर्गत बेटियों को विद्यालय भेजने की जगह उनसे घरेलू कामकाज करवाना,अभिभावकों द्वारा बालिका-मजदूरी करवाना,बेटी के पराया धन के रूप मान्यता,बेटे व बेटी में अंतर करके बेटी को शिक्षा से वंचित कर देना आदि मानसिकताओं को लेकर नारी का शैक्षणिक शोषण होता आया है l अशिक्षा के कारण एक गृहिणी होते हुए भी सही अर्थों में गृहिणी सिद्ध नहीं हो पाती है l बच्चों के लालन-पालन से लेकर घर की साज-संभाल तक किसी काम में भी कुशल न होने से उस सुख-सुविधा को जन्म नहीं दे पाती जिसकी घर में उपेक्षा की जाती है  नारी परावलम्बी और परमुखापेक्षी बनी हुई विकास से वंचित ,शिक्षा से रहित मूक जीवन बिताती हुई अनागरिक की भान्ति परिवार में जीवनयापन करती है अशिक्षा के कारण नारी का बौद्धिक एवं नैतिक विकास भी उचित रूप से नहीं हो पाता  आमतौर पर घर-परिवार में यही मान्यता बनी रहती है कि नारी को घर का काम-काज ही देखना होता है,तो उसे शिक्षा की क्या आवश्यकता है ? परिवार का मानस एक ऐसी रूढ़िवादिता से ग्रसित हो जाता है,जिसमें नारी को न तो पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है तथा न उसे वैसी सुविधा प्रदान की जाती है अशिक्षा का शिकार नारी अनेकानेक पूर्वाग्रहों ,अन्धविश्वासों ,रूढ़ियों ,कुसंस्कारों से ग्रस्त होकर अपने अधिकारों से वंचित हो जाती है अगर नारी शिक्षित होकर एक कुशल इंजीनियर, लेखिका,वकील,ड़ॉक्टर भी बन जाती है , तो भी कई बार पति व समाज द्वारा ईष्यावश उसका शैक्षणिक शोषण किया जाता है | परिणामस्वरूप नारी को शिक्षित होते हुए भी पति का अविश्वास झेलकर आर्थिक, मानसिक व दैहिक रूप से उत्पीड़ित होना पड़ता है |

नारी शिक्षा पर व्याख्या – Paragraph on Women Education in Hindi Language

प्रसंग :

शिक्षा मनुष्य को मानवता का सच्चा स्वरूप प्रदान करती है । शिक्षा के बिना मनुष्य पशवत है ।  नर को शिक्षित कर नारी को पशुवत बनाना भयकर पशुता है । इसलिए किसी भी समाज के सर्वागीण विकास के लिए नारी शिक्षा आवश्यक है । नारी नर की प्रथम शिक्षिका व गुरु है । अपनी प्रथम शिक्षिका को ही अशिक्षित
रखना घोर अज्ञानता व निपट पिछड़ेपन की निशानी है ।

महिला शिक्षा पर व्याख्या :
हमारे शास्त्रो में कहा है जहाँ नारियों पूजी जाती है अर्थात् सम्मानित की जाती है, वहाँ देवताओ व समृद्धि का वास होता है । इसलिए हमारे यहाँ नारियों का सम्मान करना प्राचीन परम्परा है । हम माता का नाम पिता से भी पहले लेते है । माता को स्वर्ग से बढ़कर बताया गया है । नारी, नर की सहभागिनी है । इसलिए प्राचीन परम्परा में हर प्रकार के कर्मकाण्ड में नारी की सहभागिता अनिवार्य थी । कोई भी कार्य नारी के बिना सम्पन्न नहीं माना जाता था । इसीलिए नारी को अर्द्धागिनी कहा गया । इसका तात्पर्य यह है कि नर, नारी के बिना अपूर्ण है । नारी पुरुष का आधा अंग है । नर-नारी मिल कर ही पूर्णाग माने जायेगे । इसलिये प्राचीन काल में नारियों को शिक्षा देने का भी विधान था । प्राचीन काल में अनेक विदुषी नारिया भारत में पैदा हुई ।

नारी शिक्षा का हो रहा पतन :
भारत कई वर्षो तक पराधीन रहा । विदेशी शासकों ने यहाँ की शिक्षा व सस्कृति को झकझोर दिया । उसका प्रत्यक्ष प्रभाव नारी शिक्षा पर पड़ा । विदेशी शासको द्वारा नारियो का शोषण होने लगा । जिसके दुष्परिणाम स्वरूप बाल विवाह का जन्म हुआ । भारतीय लोग कन्या को पढ़ाने की अपेक्षा जल्दी शादी करने में रुचि लेने लगे । इसलिए नारी शिक्षा समाप्तप्राय हो गयी । आधुनिक युग विकास व विज्ञान का युग है । भारत में आज भी नारी शिक्षा में लोगों की रुचि नही रह गयी हुँ । ग्रामीण क्षेत्रों में तो पूर्ण नारी समाज अशिक्षित है । बचपन से ही भारतीय परिवारो में लड़कियों से घर का काम काज लिया जाता है और लड़को को स्कूल भेजा जाता है ।इस पुरुष प्रधान समाज में नारी आज भी अशिक्षित है । लड़कियों को पर्दे में रखना व उन्हे अधिक लज्जालू बनाना भी नारी अशिक्षा का कारण है । इसी कारण से लड़कियों दूर के विद्यालयो में पढ़ने नहीं जा सकती हैं । नारियों के लिये शिक्षा उपलब्ध न होने से भी आज की नारी अशिक्षित रह गयी है ।

नारी शिक्षा के उपाय :

आधुनिक युग में प्रत्येक लड़के या लडकी को समान समझना चाहिये । इसीलिए प्रत्येक भारतीय को मानसिक रूप से तैयार होना चाहिये । लड़की को बचपन से ही पुरुष की तरह प्रत्येक कार्यो में भाग लेने का मौका देना चाहिये जिससे शिक्षा सस्थायों में जाने के लिए उनकी झिझक दूर हो जाये ।लड़कियों के लिये अलग शिक्षा सस्थाओं का प्रबन्ध होना चाहिये । इसलिए हर गाँव व मुहल्लों में कन्या विद्यालयों का निर्माण किया जाये । समाज में नारी शिक्षा के महत्त्व को अधिक प्रचारित किया जाए ।

नारी शिक्षा का महत्त्व :

नारी शिक्षा का महत्त्व प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित होना चाहिये, परन्तु नारी का शिक्षित होना, पुरुष से भी अधिक महत्त्वपूण है । नारी शिक्षा का महत्त्व केवल आजीविका के लिये ही नहीं है, आपितु जीवन के हर क्षेत्र में नारी का शिक्षित होना अत्यन्त अनिवार्य है । शिक्षित नारी अपनी सतान को बाल्यकाल से ही प्रगति की ओर ले जाने में सक्ष्म है । एक ग्रहणी के रूप में नारी घर का कुशल सचालन करने में समर्थ होती है । एक पुरुष की सहभागिनी होने के नाते शिक्षित नारी एक योग्य व दूरदर्शी सलाहकार होती है ।इसलिए शिक्षित नारी आजीविका भी जुटा सकती है और जीवन के हर क्षेत्र में पुरुष की योग्य सहायिका सिद्ध होती है ।
शिक्षित नारी एक सभ्य समाज का द्योतक है । आज की नारी हर क्षेत्र मे भाग लेकर पुरुष से भी आगे पहुँच रही है ।

स्त्री शिक्षा पर पोस्टर – Stri shiksha par poster in hindi

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