रामसापीर रामदेवजी महाराज का मेला कब हैं ? जानिए रामदेवजी महाराज के चमत्कार और उनके जीवन से जुडी कथा

बाबा रामदेव जी का जन्म परिचय इतिहास और मेला

मदेवजी का चमत्कारी मेले

रामसापीर रामदेवजी महाराज का मेला

बाबा रामदेवजी महाराज के मेले को हमारे देस में सबसे महत्वपूर्ण मेलो में से रामदेवजी का मेले को भी सबसे सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है बाबा रामदेव को पीरो के पीर बाबा राम सा पीर के नाम से बी जाना जाता है तथा बाबा रामदेवजी को देवो के देव बाबा रामदेव के नाम से भी जाना जाता है बाबा रामदेवजी का सबसे बड़ा मेला जिला जेसलमेर पोकरण रुणिचा धाम में बाबा राम सा पीर का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है उसी स्थन पर बाबा रामदेवजी के जन्म दिन पर सबसे बड़ा मेला लगता है बाबा रामदेव आज लाखों भक्तो की श्रदा और भक्ति का संगम बीते सैकड़ो सालों से बना हुआ हैं जिनकी वजह हैं बाबा रामदेव जी को रामदेवपीर तथा रामसापीर के नाम से भी जाना जाता हैं रुणिचा के तोमर वंश में जन्म लेंने वाले बाबा रामदेव जी आज राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता हैं (भाद्रपद बीज जन्मतिथि बाबा रामदेव जी जयंती के दिनों रामदेवरा में विशाल मेला भरता हैं )राज्य के अन्य हिस्सों सहित गुजरात मध्यप्रदेश व देश-विदेश से भक्त बाबा का दर्शन पाने के लिए सैकड़ो दिन की पैदल यात्रा कर रामदेवरा पहुचते हैं |ऐसे माना जाता हैं कि बाबा रामदेव जी का जन्म 1409 ई में हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक भादवे की बीज भाद्रपद शुक्ल द्वित्या के दिन रुणिचा के शासक अजमल जी के घर अवतार लिया था इनकी माता का नाम मैणादे था इनके एक बड़े भाई का नाम विरमदेव जी था तोमर वंशीय राजपूत में जन्म लेने वाले बाबा रामदेव जी के पिता अजमल जी निसंतान थे सन्तान सुख प्राप्ति के लिए इन्होने द्वारकाधीश जी की भक्ति की उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान् ने वरदान दिया था कि भादवे सुदी बीज को वे स्वय आपके घर बेटा बनकर अवतरित होंगे

राजा अजमल जी उनके जीवन से जुडी कथा और रामदेवजी का चमत्कारी

पोकरण के राजा अजमाल जी निसंतान थे उन्हें इस बात से इतना दुःख नही होता थ वे अपनी प्रजा को ही सन्तान समझते थे दूसरी तरफ भैरव राक्षस के आतंक से सम्पूर्ण पोकरण क्षेत्र में लोगों के भय का माहौल बना हुआ था एक दिन की बात थी मुसलाधार वर्षा होने के बाद किसान पुत्र खेत जोतने जा रहे थे
तभी उन्हें अजमाल जी महाराज के दर्शन हो गये इनके बाँझ होने के कारण बड़ा अपशगुन हुआ और वही से वापिस लौट गये जब अजमल जी ने उन किसानो को रोककर यु वापिस चले जाने का कारण पूछा तो पता चला वे निसंतान हैं और खेती की वेला बाँझ व्यक्ति के दर्शन से अपशगुन होता हैं ये शब्द अजमल जी के कलेजे को चीरने लगे अब तक प्रजा की भलाई के लिए भगवान् द्वारकाधीश से आशीर्वाद मागने वाले अजमल जी अब पुत्र कामना करने लगे इस दोरान कई बार वो गुजरात के द्वारका नगरी दर्शन भी करने गये मगर उनकी मनोइच्छा पूर्ण ना हो सकी थी आखिर उन्होंने हार मानकर मैनादे से यह कहकर अंतिम दवारका यात्रा पर निकल गये कि यदि इस बार भगवान् नही मिले तो वे अपना मुह लेकर वापिस नही आएगे अजमल जी के द्वारका जाने पर वे मन्दिर की मूर्ति से पूछने लगे हे भगवान् आखिर मैंने ऐसा क्या पाप किया जिसकी सजा मुझे दे रहे हो आप जवाब क्यों नही देते कई बार ये कहने पर उन्हें मूर्ति से कोई जवाब नही मिला तो तामस में आकर अजमल ने बाजरे के लड्डू द्वारकाधीश की मूर्ति को मारे यह देख पुजारी बौखला गया और पूछा तुम्हे क्या चाहिए अजमल जी कहने लगे मुझे- भगवान् के दर्शन चाहिए. पुजारी ने सोचा इसको भगवान् के दर्शन का कितना प्यासा हैं सोचकर कह दिया इस दरिया में द्वाराधिश रहते हैं अजमल जी ने आव देखा न ताव झट से उसमे कूद पड़े. भगवान् द्वारकाधीश सच्चे भक्ति की भक्ति भावना देखकर गद्गद हो उठे. उन्होंने उस दरिया में ही अजमल जी को दर्शन दिए और भादवा सुदी बीज सोमवार को उनके घर अवतरित होने का वचन देकर सम्मान विदा किया उसी के अनुसार शासक अजमाल जी घर पर रामदेवजी के जन्म दिन से और उसके अछे कारियो से आज तक बाबा रामदेव जी महारज का मेला लगता है और उसको पूजा जाता है

बाबा रामदेव जी की बाल लीला

ऐसा माना जाता है की एक बार बालक रामदेव ने खिलोने वाले घोड़े की जिद करने पर राजा अजमल उसे खिलोने वाले के पास् लेकर गये एवं खिलोने बनाने को कहा। राजा अजमल ने चन्दन और मखमली कपडे का घोड़ा बनाने को कहा। यह सब देखकर खिलोने वाला लालच में आ ग़या और उसने बहुत सारा कपडा बचाकर अपनी पत्नी के लिये रख लिया और उस में से कुछ ही कपडा काम में लिया जब बालक रामदेव घोड़े पर बैठे तो घोड़ा उन्हें लेकर आकाश में चला ग़या। राजा खिलोने वाले पर गुस्सा हुए तथा उसे जेल में डालने के आदेश दे दिये। कुछ समय पश्चात, बालक रामदेव वापस घोड़े के साथ आये। खिलोने वाले ने अपनी गलती स्वीकारी तथा बचने के लिये रामदेव से गुहार की। बाबा रामदेव ने दया दिखाते हुए उसे माफ़ किया। अभी भी कपडे वाला घोड़ा बाबा रामदेव की खास चढ़ावा माना जाता है।

बाबा रामदेव जी महाराज का जीवन परिचय

जन्म :- भाद्रपद शुक्ल द्वितीया वि.स. 1409
जन्म स्थान :- उण्डू-काश्मीर,जिला बाड़मेर
मृत्यु :- वि.स. 1442
मृत्यु स्थान :- रामदेवरा
समाधी :- रामदेवरा
उत्तराधिकारी :- अजमल जी
जीवन संगी :- नैतलदे
राज घराना :- तोमर वंशीय राजपूत
पिता :- अजमल जी
माता :- मैणादे
धर्म :- हिन्दू

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